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पेठा बाजार में होने लगी स्टॉक की कमी

आगरा। वरिष्ठ संवाददाता। शहर को देश-विदेश में पहचान देने वाले पेठा उद्योग पर संकट शुरू हो गया है। प्रदूषण की कसौटी पर नूरी दरवाजा की इकाइयों के खरा न उतरने से जो उत्पादन प्रभावित हुआ, उसका विकल्प उद्योग अभी तक खोज नहीं सका है। शहीद भगत सिंह कुटीर पेठा एसोसिएशन के राजेश अग्रवाल ने बताया कि बाजार में स्टॉक की कमी होने लगी है। आर्डर प्रभावित होने लगे हैं। इसके कारण पेठे के थोक रेट में पांच से सात फीसदी की वृद्धि हो गई है।

यदि मौजूदा हाल कायम रहे तो इस बार होली के सीजन में पेठे की किल्लत हो जाएगी। मिट जाएगी पहचानपेठा कारोबारी सुनील के अनुसार उद्योग को कोयले का सस्ता और अच्छा विकल्प नहीं दिया गया तो इसका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। पेठे की चाहत की एक बड़ी वजह इसके दाम है। अन्य मिठाइयों की तुलना में इसके दाम कम रहने से इसके खरीदारों का दायरा बड़ा है। यदि इकाइयों ने महंगे विकल्प के साथ पेठा तैयार किया तो उसकी बिक्री गिरने की आशंका है।

एक बड़ी दिक्कत अनुसंधान की भी है। इकाइयां आज भी ईंधन के अन्य विकल्पों के लिए तैयार नहीं है। प्रतिस्पर्धा के कारण कम मुनाफे पर माल बेचने वाली इकाइयों के पास इतनी पूंजी नहीं है कि वे अपग्रेड के लिए होने वाले खर्च को सह सकें। यह स्थिति कालिंदी वहिार में शिफ्टिंग पर भी आएगी क्योंकि 80 फीसदी इकाइयां इतनी सक्षम नहीं कि नया सेट अप बना सकें। सिर्फ पांच कनेक्शन हुएजिला प्रशासन के सहयोग से शुक्रवार को भी नूरी दरवाजा क्षेत्र में एक शिविर लगाकर मौके पर ही कॉमर्शियल गैस के कनेक्शन दिए गए।

बीते दिन की तुलना में मात्र दस फीसदी आवेदन ही आए और पांच इकाइयों ने इस शिविर में कनेक्शन हासिल किए। प्रत्येक कनेक्शन 3854 रुपये की राशि जमा की गई। शिविर में सिकरवार गैस सर्विस, भारत गैस एजेंसी और आदित्य गैस सर्विस के प्रतिनिधि श्याम वीर सिंह, आशीष शुक्ला और गुड्डा शामिल रहे। श्याम वीर सिंह ने बताया कि अब तक तीन दिन शिविर चलाया जा चुका है और कुल 71 कनेक्शन जारी हुए हैं। ये सभी एक सिलेंडर वाले हैं।

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