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बदायूं में बैठे हैं मेरठ गैंग के मददगार

 बदायूं। हिन्दुस्तान संवाद। पुलिस ने शुक्रवार को भले ही शहर से फिल्मी स्टाइल में लाखों के लैपटॉप पार करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया है लेकिन इस गिरोह की जड़ें जमाने में सहयोग करने वालों की गिरफ्तारी बाकी है। बिना स्थानीय मदद के गैर जिले का गिरोह जिले में आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे पाएगा, यह मुश्किल है। अधिकारियों का भी यही कहना है कि गिरोह को सूचनाएं देने वालों को चहि्नित किया जा रहा है।

एक अंतर्जनपदीय गिरोह जिले में ठहरकर घटनाओं को अंजाम देता रहा लेकिन इसकी भनक न तो पुलिस को लगी और न खुफिया अमला यह सूचना जुटा सका। गिरोह यहां के व्यापारियों को लाखों का चूना लगाकर निकल गया और पुलिस लकीर पीटती रह गई। इतना जरूर हुआ कि अभिषेक रस्तोगी की दुकान में हुई चोरी की घटना के बाद पुलिस को यह स्पष्ट हो गया कि यहां फिलहाल ऐसा कोई अपराधी नहीं है जो एक ही स्टाइल में किसी वारदात को अंजाम दे सके।

गिरोह के सदस्य लैपटॉप लेकर सीमा पार कर गए और पुलिस लोकल स्तर पर चोरों को उठाकर उनसे पूछताछ करती रही। एसएसपी ने क्राइम ब्रांच की स्वाट टीम को इसकी जिम्मेदारी सौंपी तो इन लैपटॉप की नगिरानी शुरू की गई। चर्चा यह भी है कि एक लैपटॉप पिछले दिनों मेरठ में इंटरनेट से जोड़ा गया, यहीं से स्वाट टीम को क्लू मिले और तफ्तीश आगे बढ़ाई गई। नतीजतन गिरोह हत्थे चढ़ गया लेकिन पर्दे के पीछे छिपे स्थानीय अपराधी जो रेकी करके गिरोह को सूचनाएं दे रहे थे, अभी भी पकड़ से बाहर हैं।

कुछ के नाम भी कबूले इस गिरोह ने बदायूं में रहने वाले अपने सहयोगियों के नाम गिरोह के सदस्यों ने पुलिस की पूछताछ में कबूले हैं। ये वो लोग हैं जो दिनभर रेकी करके दुकानों की भौगोलिक और माली स्थिति का जायजा लेते और गिरोह को मुखबिरी देते थे। इसके बाद गिरोह सक्रिय होता और पिकेट के पास घटना को अंजाम देकर निकल जाता। फिलहाल अधिकारियों का कहना है कि इन लोगों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाने के साथ ही फरार सदस्यों की गिरफ्तारी की जाएगी।

उनका बयान भी दर्ज होगा। रेकी के वक्त फरार आरोपी खुसरो भी स्थानीय अपराधियों के साथ रहता था। खेल ने पहुंचाया जेलकम्प्यूटर की दुकानों में लगे सीसीटीवी फुटेज में गिरोह के एक सदस्य की कदकाठी चहि्नित हुई थी। लैपटॉप निकालने के बाद दोनों घटनाओं में इस सदस्य ने वहां कभी लाइट बुझाने के लिए वापस लौटने का खेल किया तो कभी कैमरों के आगे पीछे जान बूझकर भागा। इस सदस्य को वशि्वास था कि पुलिस उसे इन हरकतों से नहीं पकड़ सकेगी लेकिन यही खेल उसे जेल तक पहुंचा गया।

रिकवरी अभी बाकीपांच सदस्यों की गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस ने देवेंद्र विष्ट के सात लैपटॉप बरामद कर लिए हैं जबकि उनकी दुकान से 21 लैपटॉप चोरी गए थे। अभिषेक रस्तोगी के 17 लैपटॉप मिले हैं जबकि उनकी दुकान से 40 लैपटॉप पार हुए थे। ऐसे में पुलिस को अभी 37 लैपटॉप और तलाशने हैं। साथ ही कम्प्यूटर एसेसरीज का भी पता करना शेष है। इस टीम ने किया पर्दाफाशलैपटॉप बरामद करने वाली टीम में स्वाट प्रभारी एसआई इंद्रेश सिंह के अलावा एसआई राकेश चौहान, कांस्टेबिल सुभाष, विपिन, सौरभ शुक्ला, मनोज और पुष्पेंद्र राना शामिल हैं।

इनको एसएसपी ने पांच हजार का इनाम दिया है। कम्प्यूटर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी टीम को 5100 रुपये का इनाम देने की इच्छा जताई लेकिन एसएसपी ने उन्हें इनाम की जगह अपने मार्केट में सीसीटीवी कैमरे लगवाने का सुझाव दिया।

---------यह सही है कि स्थानीय मदद के बिना गैर जिले का गिरोह यहां काम नहीं कर सकता। यहां के कुछ लोगों ने उन्हें रेकी करके सूचनाएं दी थीं। सभी की नगिरानी की जा रही है। सबूत मिलते ही उनकी गिरफ्तारी भी करेंगे।

अतुल सक्सेना, एसएसपी।

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