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बलि का अहंकार चूर करने को लिया वामन अवतार

 सहसवान। हिन्दुस्तान संवाद।  गांव शेखपुर में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह में मथुरा से पधारे कथा व्यास मनीषाचार्य ने कृष्ण रुक्मणी वविाह का सुन्दर वृतांत सुनाकर भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। इस दौरान कृष्ण- रुक्मणी की आकर्षक झांकी भी सजाई गई। इसकी ग्रामीणों ने पूजा अर्चना की।

कृष्ण-रुक्मणी वविाह की कथा से पूर्व कथा व्यास ने वामन अवतार की कथा सुनाते हुए कहा कि राजा बलि को यह अभिमान था कि उसके बराबर समर्थ इस संसार में कोई नहीं है। भगवान ने राजा बलि का अभिमान चूर करने के लिए वामन का रूप धारण किया और भिम्क्षा मागने राजा बलि के पास पहुंच गये। अभिमान से चूर राजा ने वामन को उसकी इच्छानुसार दक्षिणा देने का वचन दिया। वामन रूपी भगवान ने राजा से दान में तीन पग भूमि मांगी।

राजा वामन का छोटा स्वरूप देख हंसा और तीन पग धरती नापने को कहा। इसके बाद भगवान ने विराट रूप धारण कर एक पग में धरती आकाश दूसरे पग में पाताल नाप लिया और राजा से अपना तीसरा पग रखने के लिए स्थान मांगा। प्रभु का विराट रूप देख राजा का घमंड टूट गया और वह दोनों हाथ जोड़कर प्रभु के आगे नतमस्तक होकर बैठ गया और तीसरा पग अपने सर पर रखने की प्रार्थना की। इसके बाद कथा व्यास ने कृष्ण-रुक्मणी वविाह वर्णन किया।

मोहन आचार्य, अखिल शास्त्री, उमेश शर्मा ने कथा के दौरान वाद्ययंत्रों पर संगत दी। इस मौके पर विनोद शर्मा समेत सैकड़ो ग्रामीण मौजूद रहे।

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