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कर्म से ही पता चलते हैं मनुष्य के दोष: मनीष

ढकिया/शाहबाद। हिन्दुस्तान संवाद।  कथावाचक मनीष शास्त्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि मन का स्वरूप समझने के लिए कर्म करना आवश्यक है। जब आप कर्म ही नहीं करेंगे तो अपके दोष दिखाई नहीं देगें। यदि मनुष्य को अपने दोषों का ज्ञान नहीं होगा तो उसका विकास वहीं रुक जायेगा। वह क्षेत्र के चकासी गांव में आयोजित किए जा रहे नौ दिवसीय भागवतकथा के दूसरे दिन भक्तों के समक्ष प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस तरह पानी ऊपर से साफ दिखाई देता है परन्तु पत्थर डालने पर तुरन्त छुपी गन्दगी ऊपर आ जाती है।

वैसे ही दशा हमारे मन की है। लोग कहते हैं कि सफेद खादी नहीं चाहिए मैली हो जाती है रंगीन मैली नहीं होती। उन्होंने लोगों से कहा मैली तो रंगीन खादी भी होती है। लेकिन सफेद खादी का मैल नजर आकर बोलता है। और, बोलने वाली खादी लोगों को पसन्द नहीं आती। इसी तरह कर्म भी बोलता है। कर्म यह बताता है कि आप क्रोधी हैं, स्वार्थी हैं। कर्म दर्पण है जो हमारा स्वरूप हमें दिखाता है। कर्म की बदौलत ही हमारे मन की गन्दगी.कचरा बाहर आता है।

इसलिए अपने प्रगाति और विकास के लिए निरन्तर कर्म करते रहें। और, निर्मल होने का प्रयत्न करते रहे। इस दौरान राजकुमार शर्मा, बब्लू चौधरी, हुकम सिंह, मुनेन्द्र सिंह, राजेन्द्र सिंह आादि मौजूद रहें ।

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