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निजीकरण के विरोध में उतरे इंजीनियर

हिन्दुस्तान संवाद अलीगढ़। निजीकरण से न केवल विभाग को बल्कि उपभोक्ताओं को भी नुकसान होगा। सरकार अपने फायदे के लिए जनता को परेशानी में डालना चाह रही है। गुरुवार को प्रदेश सरकार की ओर से बिजली व्यवस्था के निजीकरण के प्रस्ताव पर ऐसा ही उबाल बिजली विभाग के इंजीनियरों में दिखा। इस दौरान उन्होंने कार्य बहिष्कार किया और चीफ इंजीनियर कार्यालय पर धरना देकर अपनी मांगें उठाते रहे। इधर दूसरी ओर कार्य बहिष्कार का असर जनता पर बुरी तरह पड़ा।

लोग अपने कामों के लिए भटकते रहे। लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी। प्रदेश सरकार की ओर से पिछले साल बिजली विभाग के निजीकरण का प्रस्ताव रखा गया था। जिसको लेकर पिछले साल भी बिजली अधिकारियों और कर्मचारियों ने जमकर विरोध जताया था। जिसके बाद से प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। लेकिन पिछले कुछ समय से बिजली उत्पादन में गिरावट और राजस्व की कमी से बिजली खरीद न हो पाने से प्रदेश सरकार की ओर से एक बार फिर बिजली व्यवस्था का निजीकरण करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

जिसको लेकर एक बार फिर विरोध के सुर उठने लगे हैं। गुरुवार को इसको लकर नाराज बिजली अधिकारियों और इंजीनियरों ने संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में गुरुवार को सभी ने एक दिवसीय कार्य बहिष्कार किया और चीफ इंजीनियर कार्यालय पर धरने पर बैठ गए। इस दौरान वे प्रदेश सरकार की ओर से निजीकरण के प्रस्ताव को खारिज करने की मांग उठाते रहे। दूसरी ओर इसका असर बिजलीघर आने वाले लोगों पर भी बुरी तरह से पड़ा। संघर्ष समिति के नेता कुलदीप कुलश्रेष्ठ ने बताया कि प्रदेश सरकार ने टोरंट को बिजली व्यवस्था सौंपी, जिसमें लगभग 16 सौ करोड़ का घाटा हुआ।

सरकार का यह प्रयोग विफल हो चुका है। इसके बाद भी सरकार अपनी मनमानी पर उतारू है। अगर इस एक दिनी धरने के बाद भी इसके प्रस्ताव को निरस्त नहीं किया गया, तो और भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर खेमचन्द्र शर्मा, नजीर हुसैन, जंट सिंह, रतनपाल, यूसी वर्मा, एसके चौधरी, वीके अग्रवाल, एसके अग्रवाल, राम नविास शर्मा, राधेश्याम गुप्ता, प्रेमपाल सिंह यादव, शरद सक्सेना, आरके शर्मा, संजय शर्मा, प्रदीप कुमार शर्मा आदि उपस्थित रहे।

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