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फिल्म रिव्यू: हंसी तो फंसी

फिल्म रिव्यू: हंसी तो फंसी

फिल्म की कहानी बताने से पहले जरा कुछ गीत गुनगुना लिये जाएं। शायद कहानी बताने की जरूरत ही न पड़े। जरा गौर फरमाइए, किशोर दा की फिल्म ‘चलती का नाम गाड़ी’ का गीत- ऐ याने याने याने प्यार हो गया.. आमिर-उर्मिला पर फिल्माया फिल्म ‘रंगीला’ का गीत- क्या करें, क्या न करें, ये कैसी मुश्किल हाय.. और फिल्म ‘जब जब फूल खिले’ का एक गीत ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे.. मुझे लगता है कि अब फिल्मी रसियाओं को दिमाग पर ज्यादा जोर डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

विज्ञापन फिल्मों की दुनिया से आए निर्देशक विनिल मैथ्यू की फिल्म ‘हंसी तो फंसी’ की नब्ज बॉलीवुड के बरसों पुराने फॉर्मूले पर फड़कती है। एक हीरो और दो हीरोइन। हीरो जिस लड़की से प्यार करता है, इंटरवल तक उससे उसका दिल उखड़ जाता है और दूसरी पसंद आने लगती है और क्लाईमेक्स में क्या होता है, ये सब जानते हैं। पर खासियत ये है कि इस रटे-रटाए फॉर्मूले पर भी सैकड़ों फिल्में हिट रही हैं।

विनिल मैथ्यू ने भी इस फॉर्मूले को एक नयी ताजगी के साथ पेश किया है। ताजगियों के जिक्र से पहले कहानी- निखिल (सिद्धार्थ मल्होत्रा) और करिश्मा (अदा शर्मा) एक दूसरे से शादी करने वाले हैं। एक दिन अचानक करिश्मा की बहन मीता (परिणीति चोपड़ा) चीन से आ जाती है, जिसे करिश्मा घर नहीं ले जा सकती, क्योंकि मीता सात साल पहले घर से चोरी कर भागी थी। मीता निखिल के घर रहने लगती है। पर मीता लगातार इस कोशिश में रहती है कि वो अपने पिता से मिल सके और मांफी मांगे। लेकिन हालात साथ नहीं देते। उधर, शादी सिर पर होने के बावजूद निखिल और करिश्मा में आये दिन छोटी-छोटी बातों पर खटपट होती रहती है।

निखिल को अपनी शादी के लिए पांच करोड़ रुपये चाहिए और उधर मीता को चीन में अपनी लैब बचाने, जिसके शोध के लिए वह घर से भागी थी, के लिए दस करोड़। इन अजीब स्थितियों के बीच मीता और निखिल एक दूजे के करीब आ जाते हैं। और फिर शुरू हो जाता है दोनों के बीच केमिकल रिएक्शन। फिल्म में एक तरफ रूटीन मसाला है तो दूसरी तरफ ये इशारा भी किया गया है कि आज भी हमारे समाज में एक बाप के लिए बेटी की शादी से बड़ी चिंता कोई नहीं है, भले ही उसकी दूसरी बेटी अपनी पढ़ाई के खर्चे के लिए उससे पैसा मांगती रहे। शादी करने जा रही एक लड़की की चिंता इस बात को लेकर है कि उसके होने वाले पति ने पांच करोड़ रुपये का इंतजाम किया या नहीं।

विनिल ने इन कुछेक बातों को बहुत सहज अंदाज से उठाया है। इसमें कोई दो राय नहीं कि परिणीति फिल्म की जान हैं। सिद्धार्थ मल्होत्रा अभी उस दौर में हैं, जिसमें कभी अर्जुन रामपाल हुआ करते थे। फिर भी अपनी पहली फिल्म से वो थोड़ा बेहतर लगे हैं। कुल मिला कर ‘हंसी तो फंसी’ इस साल आई पहली बढ़िया रोमांटिक फिल्म कही जा सकती है।
सितारे:  सिद्धार्थ मल्होत्रा, परिणीति चोपड़ा, अदा शर्मा, शरत सक्सेना, मनोज जोशी, नीना कुलकर्णी
निर्देशक: विनिल मैथ्यू
निर्माता: करण जौहर, विकास बहल, विक्रमादित्य मोटवानी, अनुराग कश्यप
बैनर: धर्मा प्रोडक्शंस, फैंटम प्रोडक्शंस
संगीत: विशाल-शेखर
गीत: अमिताभ भट्टाचार्य

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