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फिल्म रिव्यू: हार्टलेस

फिल्म रिव्यू: हार्टलेस

अभिनेता से निर्देशक बने शेखर सुमन की फिल्म ‘हार्टलेस’ कई मायनों में बहुत अच्छी न सही, फिर भी एक औसत फिल्म तो कही ही जा सकती है। इसके अलावा अगर किसी ने हॉलीवुड फिल्म ‘अवेक’ न देखी हो तो यह भी संभव है कि वह फिल्म को सराहे भी। जी हां, ये फिल्म उसी हॉलीवुड फिल्म से प्रेरित है, जिसे जॉबी हैरॉल्ड ने निर्देशित किया और इसकी अभिनेत्री थीं, जेसिका अल्बा। इस फिल्म को समीक्षकों ने सिरे से नकार दिया था। शेखर सुमन की ‘हार्टलैस’ देख कर और ठीक से समझ में आ जाएगा कि फिल्म ‘अवेक’ को समीक्षकों ने सिरे से क्यों नकार दिया था।

आदित्य (अध्ययन सुमन) एक बिजनेसमैन है। उसकी मां गायत्री (दीप्ति नवल) उसे बेहद प्यार करती है। आदित्य का दिल ट्रांसप्लांट होना है, पर अपनी मां के बार-बार कहने पर भी वह इस ट्रांसप्लांटेशन के लिए राजी नहीं होता। आदित्य अपने बिजनेस के सिलसिले में दुबई जाता है, जहां उसकी मुलाकात एक होटल की रिसेप्शनिस्ट रिया (अरियाना अयाम) से होती है। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगती हैं, लेकिन एक दिन अचानक आदित्य की तबीयत खराब हो जाती है। उसे तुरंत हार्ट ट्रांसप्लांट कराना है। इसके लिए वह अपने नामी सजर्न दोस्त (शेखर सुमन) की मदद लेता है, लेकिन तभी अचानक कुछ ऐसा होता है कि आदित्य की जिंदगी में भूचाल आ जाता है।

फिल्म देख कर ये साफ पता चलता है कि शेखर सुमन ने पहली बार निर्देशक की कुर्सी संभाली है और उन्हें अभी इस दिशा में बहुत काम करने की जरूरत है। उन्होंने कई ऐसी गलतियां की हैं, जिसे एक अनुभवी निर्देशक नहीं करता। साफ लगता है कि बेटे अध्ययन के करियर की डूबती नैया को पार लगाने के लिए ये फिल्म बनाई गई है। अध्ययन अभिनय के मामले में फिसड्डी नजर आते हैं। कहानी में भी दम नहीं है। बस कुछेक जगहों पर फिल्म बांधती है। हालांकि खुद शेखर सुमन, दीप्ति नवल और ओम पुरी ने अच्छा काम किया है। जैसा कि ऊपर कहा गया है, ‘अवेक’ में भी कुछ ऐसी ही खामियां थीं।

सितारे: अध्ययन सुमन, शेखर सुमन, दीप्ति नवल, ओम पुरी, अरियाना अयाम, मदन जैन
निर्देशक: शेखर सुमन
निर्माता: अलका सुमन

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