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फिल्म रिव्यू: बबलू हैप्पी है

फिल्म रिव्यू: बबलू हैप्पी है

कुछ और कहने-सुनने से पहले जरा इस फिल्म के निर्देशक के बारे में जान लें। नीला माधव पांडा की पहली फिल्म ‘आई एम कलाम’ को एक नेशनल अवॉर्ड और करीब 24 अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड मिले। दूसरी फिल्म ‘जलपरी: दि डेजर्ट मरमेड’ को भी कई अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड मिले और खूब सराही भी गयी। उनकी पिछली दोनों फिल्मों को देखते हुए एक बार फिर ये उम्मीद जगी थी कि पांडा अपनी इस तीसरी फिल्म में वही जादू जगाएंगे, जो भले ही आम दर्शकों को आकर्षित न कर पाए, लेकिन गंभीर फिल्मों के शौकीनों को जरूर आकर्षित करेगी।

इस उम्मीद से आए गंभीर फिल्मों के शौकीन दर्शकों को उनकी इस नयी फिल्म से निराशा हाथ लगेगी। फिल्म के पहले ही सीन से ये साफ हो जाता है कि ये फिल्म एक मसाला एंटरटेनर है, लेकिन हद तब हो जाती है, जब निर्देशक मसाला फिल्म में सतही तौर पर सामाजिक सरोकारों की बातें करने लग जाता है। इस फिल्म के साथ भी यही हुआ है। ये कहानी है तीन दोस्तों, जतिन (साहिल आनंद), हैरी (सुमित सूरी) और रोहन (अमोल पाराशर) की। जतिन की शादी होने वाली है तमन्ना (एरिका फर्नाडिस) से।

तमन्ना को एक शादी में मनाली जाना है। ये तीनों भी उसके पीछे-पीछे मनाली के लिए निकल लेते हैं। अचानक तमन्ना एक एनजीओ से जुड़ जाती है। फिल्म का झुकाव एचआईवी एड्स जागरूकता अभियान से होते हुए एक लव ट्राएंगल पर सिमट जाता है। मजा बढ़ाने के लिए हिप हॉप स्टाइल में हार्ड कौर और मीका के आइटम गीत भी डाल दिये गए हैं। दर्शक सोचते रह जाते हैं कि ये क्या हो रहा है। फिल्म का ट्रीटमेंट बेहद खराब है। बिना सिर-पैर का मामला है। कमियां इतनी हैं कि गिनती खत्म हो जाए। एक होनहार निर्देशक के ऐसे हश्र की उम्मीद बिल्कुल नहीं थी।

सितारे: साहिल आनंद, एरिका फर्नाडिस, सुमित सूरी, अमोल पाराशर, प्रीत कमल, रायना मल्होत्रा, प्रवीण डबास, गुलजार खान, अमित राणा
निर्देशक: नीला माधव पांडा
निर्माता: गगन धवन, रवि दत्ता, नरेन्द्र सिंह

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