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परिणीति में भोलापन है

परिणीति में भोलापन है

लगभग बीस साल पहले निर्देशक बनने के लिए सत्रह साल की उम्र में माता-पिता की मर्जी के खिलाफ घर छोड़ कर मुंबई का रुख करने वाले विनिल मैथ्यू ने सबसे पहले विज्ञापन फिल्म निर्माता व निर्देशक के रूप में अपनी पहचान बनायी। अब वह बतौर स्वतंत्र निर्देशक पहली रोमांटिक कॉमेडी फिल्म ‘हंसी तो फंसी’ लेकर आए हैं।

अपनी अब तक की यात्रा पर कुछ कहना चाहेंगे?
मैं दक्षिण मलयाली हूं। मेरी शिक्षा-दीक्षा दिल्ली में हुई है। मेरे पिता मुझे फिल्में नहीं देखने देते थे। एक बार मैं अपने कुछ दोस्तों के साथ फिल्म ‘रोजा’ देखने गया था।  उस फिल्म को देखने के बाद मैंने तय कर लिया था कि मुझे भी एक न एक दिन फिल्म निर्देशित करनी है। स्कूल की छुट्टियों के दिनों में 17 साल की उम्र में मैं मुंबई आ गया। यहां मैंने सबसे पहले भारत बाला के साथ बतौर सहायक निर्देशक काम शुरू किया। उनके साथ तीन माह  बिताने के बाद अपनी पढ़ाई पूरी करने दिल्ली वापस आ गया। उसके बाद भारत बाला के साथ ही ‘वंदे मातरम’ के निर्माण के दौरान काम किया। फिर ‘पुणे फिल्म संस्थान’ से अपने पिता की मर्जी के खिलाफ निर्देशन की ट्रेनिंग ली। 2000 में मुंबई आकर प्रसून पांडे के सहायक के रूप में काम करना शुरू किया। दो साल बाद अपनी कंपनी बनायी, पर बात जमी नहीं तो विज्ञापन फिल्में निर्देशित करनी शुरू कर दीं। ‘नेस्ले’ की विज्ञापन फिल्म की शूटिंग के दौरान मेरी मुलाकात करण जौहर से हुई, जिन्हें मेरी कहानी पसंद आयी और अब मेरी पहली फिल्म के रूप में दर्शकों के सामने हाजिर है।

फिल्म का यूएसपी क्या है?
यह एक रोमांटिक कॉमेडी है। इसमें यह दिखाया गया है कि दो अलग-अलग व्यक्तित्व के लोग किस तरह एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं। यह एक हास्यमय कथा है।

परिणीति को क्या सोच कर लिया?
परिणीति चोपड़ा के चेहरे पर भोलापन  है, साथ ही एक अलग तरह की चमक भी। उसी भोलेपन ने मुझे मीता के किरदार में उन्हें लेने को उकसाया। वह बेहतरीन कलाकार हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग भी अच्छी है। उन्होंने इस फिल्म में एक पागल वैज्ञानिक का किरदार निभाया है। इसके लिए जरूरी था कि परदे पर पागलपन उभर कर आए और परिणीति ने वह कमाल कर दिखाया है।

सिद्धार्थ मल्होत्रा के बारे में क्या कहेंगे?
सिद्धार्थ को फिल्म माध्यम की अच्छी समझ है। वह बतौर सहायक निर्देशक काम करते हुए फिल्म विधा की बारीकियों से वाकिफ हो गए हैं, इसलिए उनके साथ काम करने का अलग आनंद रहा। एक कलाकार के तौर पर उनकी आंखें बहुत बोलती हैं, जो कि कलाकार के काम को आसान बना देती हैं।

बतौर निर्देशक करियर की शुरुआत रोमांटिक कॉमेडी के साथ क्यों?
मैं अपने करियर की शुरुआत एक कठिन जॉनर से करना चाहता था। मेरी नजर में रोमांटिक कॉमेडी का जॉनर सबसे ज्यादा कठिन है।

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