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कैग आडिट के खिलाफ बड़ी पीठ गए तीन निजी डिस्कॉम

कैग आडिट के खिलाफ बड़ी पीठ गए तीन निजी डिस्कॉम

तीन निजी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) ने एकल न्यायाधीश पीठ के उस आदेश के खिलाफ शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। एकल पीठ ने दिल्ली सरकार के कैग को उनके खातों की आडिट करने के लिए कहने के निर्णय पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

मुख्य न्यायाधीश एन वी रमण और न्यायमूर्ति आर एस एंडला की पीठ ने टाटा पावर डेल्ही डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड और रिलायंस अनिल धीरुभाई अंबानी ग्रुप फर्म्स, बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड और बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड की अंतऱ़अदालत अपील पर सुनवायी 14 फरवरी को करना तय किया।

इस मामले में पहले दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व कर चुके अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि इन तीन याचिकाओं को उस अन्य पीठ को स्थानांतरित किया जाए जिसे ऐसे ही एक मुद्दे पर एक जनहित याचिका पर सुनवायी करनी है और जिसने टेलीकॉम कंपनियों के कैग आडिट के मामले में निर्णय किया था।

पीठ ने कहा कि हम इस पर अगली तिथि पर सुनवायी करेंगे। एकल पीठ ने गत 24 जनवरी को ना केवल निजी बिजली वितरण कंपनियों के कैग आडिट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, बल्कि उनसे कहा था कि वे मांगी गई जानकारी मुहैया कराकर कैग के साथ सहयोग करें।

बिजली वितरण कंपनियों ने आम आदमी पार्टी नीत सरकार के उस निर्णय के खिलाफ यह कहते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था कि कैग को निजी कंपनियों के खातों की जांच करने का अधिकार नहीं है। तीनों निजी कंपनियां 2002 में अस्तित्व में आयी थीं जब तत्कालीन दिल्ली सरकार ने बिजली वितरण का निजीकरण करने का फैसला किया था। दिल्ली वितरण कंपनियों में निजी कंपनियों और दिल्ली सरकार की 51:49 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।

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