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पुराने आतंकवादी की वापसी

लो मैं आ गया। यह फिल्मी अंदाज है तालिबानी जेहादी मौलवी हक्कानी का। अपनी वापसी को हक्कानी ने एक डीवीडी के माध्यम से दुनिया के सामने रखा है। डीवीडी में दिखाया गया है एक बड़ा विस्फोट। चारों तरफ आग ही आग। धुएं के बादलों के बीच उभरती एक आकृति। यह आकृति और किसी की नहीं खूंखार आतंकवादी हक्कानी की है। वह इसमें कहते हुए दिखाया गया है कि लो मैं फिर आ गया। असल में यह जुमला अमेरिका और उसकी खुफिया एजेन्सियों को चिढ़ाने के लिए कहा गया है। अमेरिकी खुफिया एजेन्सी हक्कानी को लगभग मरा हुआ मान चुकी थी। इस जुमले में अफगानिस्तान में तैनात नाटो और अमेरिकी फौाों को चुनौती भी दी गई है। हक्कानी अफगानिस्तान में अमेरिका के साये में पल-बढ़ रहे लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकता है। वह बिन लादेन का काफी करीबी माना जाता है। बिन लादेन के कहने पर ही अफगानिस्तान में जब तालिबानियों की सरकार बनी थी तो हक्कानी को उसमें बतौर जनजातीय मंत्री शामिल किया गया था। यही नहीं 2001 में तोरा बोरा की पहाड़ियों में अमेरिकी सेना से तालिबानियों की मुठोड़ के दौरान बिन लादेन और उसके परिवार को हक्कानी ने अपने प्रभाव वाले पाकिस्तानी कबीलाई इलाके में शरण दी थी। हक्कानी के पुनरावतार के बाद अफगानिस्तान में एक बार फिर भारी खून खराबा हो सकता है। कंधार जेल पर हाल में हुआ हमला इसकी ताजा मिशाल है। हक्कानी की एक साल तक गुमनामी के बीच रहा। सच जो भी हो लेकिन असलियत यह है कि तालिबानी इलाकों में उसकी पकड़ कभी भी कमजोर नहीं हुई। उसकी अनुपस्थिति में हक्कानी के बेटे सिराजुद्दीन ने कमान संभाल रखी थी। जो अपने पिता से अधिक खूंखार है और शैतानियत में अपने पिता को भी पीछे छोड़ चुका है। हक्कानी आज अफगानिस्तान में अमेरिका का दुश्मन नम्बर वन है। दिलचस्प बात यह है कि 10 में अफगानिस्तान में सोवियत हस्तक्षेप के दिनों में हक्कानी अमेरिकी खुफिया एजेन्सियों का पक्का दोस्त था। हक्कानी के पाकिस्तानी खुफिया एजेन्सी आईएसआई और सउदी खुफिया एजेन्सियों से भी गहर ताल्लुक हैं। हक्कानी का अफगानिस्तान से लेकर पाकिस्तान के कबिलाई इलाके तक में कब्जा है। वह यहां मदरसे चलाता है। इस्लामी शिक्षा के तालिबानी संस्करण इन मदरसों में पढ़ाया जाता है। यहीं आत्मघाती हमलावारों की पहचान की जाती है। बाद में उन्हें शिविरों में ोज कर पक्का किया जाता है। हाल में पाकिस्तानी फौाों द्वारा हक्कानी के प्रभाव वाले इलाकों में किये गये हमलों से टक्कर लेने के लिए उसके बेटे ने उाबेकिस्तान, चेचेन्या, तुर्की और मिडिल ईस्ट के जेहादियों को सीमाई मिराम और मीर अली में जमा किया है। इसमें हक्कानी की अरब पत्नी की अहम भूमिका रही है। आज हक्कानी अपने बेटे सिराजुद्दीन और अपने पुराने दोस्त बिन लादेन और अरबों की मदद से अफगानिस्तान से विदेशी फोों को खदेड़ने के मिशन में लगा हुआ है। उसने अपनी डीवीडी में कहा है कि हम संयम से इस मिशन को कामयाब करंगे। मजबूत जानवर जब छोटे जानवर से लड़ता है तो अपनी पूरी ताकत झोंक देता है। यदि छोटा जानवर संयम से काम लेता है तो वह ताकतवर के संयम खोते ही उसे पटखनी दे देता है। काबुल ज्यादा दूर नहीं है।

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