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थकान को दिखाएं बाहर का रास्ता

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थकान का सबसे सामान्य चिकित्सकीय कारण है, आयरन की कमी यानी एनीमिया। यह 20 में से एक पुरुष और मेनोपॉज के स्तर को पहुंच चुकी महिलाओं में होता है, लेकिन यह समस्या उन महिलाओं में 25-30 प्रतिशत अधिक होती है, जिन्हें पीरियड्स होते हैं। गर्भवती महिलाएं भी आमतौर पर एनीमिया से पीडित होती हैं।

अगर आप अकसर थका हुआ महसूस करते हैं, और आप में ऊर्जा की कमी रहती है तो आप अकेले नहीं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 5 में से 1 व्यक्ति हर समय हल्की थकान से और 10 में से 1 लंबे समय तक रहने वाली थकान से निढाल रहता है। कई लोगों में थकान कभी न खत्म होने वाली समस्या बन जाती है। इससे उनके जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है। थकान की समस्या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा होती है। थकान कई शारीरिक और मनोवैज्ञानिक कारणों से होती है। आप इन कारणों को जानकर और अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर इस थकान से बच सकते हैं।

थकान के कारण
शरीर का भार सामान्य से अधिक या कम होना।
थाइरॉयड ग्रंथि का ठीक तरह से काम नहीं करना।
हृदय रोग, मानसिक तनाव, चिंता, अनिद्रा या अवसाद।
अत्यधिक कैफीन या अल्कोहल का सेवन अनिद्रा बढ़ाकर थकान का कारण बनता है।
पेट और छाती का संक्रमण।
शक्तिशाली पेनकिलर का सेवन।
कैंसर का उपचार, जैसे रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी।
शराब का अत्यधिक सेवन।
डायबिटीज में रक्त में शूगर का स्तर अत्यधिक बढ़ जाना।
दवाइयों के साइड इफेक्ट विशेषकर माइग्रेन और हाई ब्लड प्रेशर को रोकने वाली दवाइयों में मौजूद रसायनों के।
डायरिया, एनीमिया या वायरल फीवर।
मानसिक या शारीरिक तनाव।
विटामिन और मिनरलों की कमी।
गर्भावस्था।
थकान गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती है।
थकान की समस्या अगर लंबे समय तक बनी रहे तो डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है
एनीमिया
कैंसर
डायबिटीज
हाइपोथायराइडिज्म
मल्टीपल स्क्लेरोसिस
हृदय या छाती की समस्या

थकान के लक्षण
ऊर्जा की कमी।
आलस और उत्साह की कमी।
नींद अधिक आना।
ध्यानकेंद्रन की क्षमता कम होना।
निर्णय लेने में कठिनाई होना।
रोजमर्रा के काम करने में कठिनाई होना।
डिप्रेस महसूस करना।

थकान से बचने के उपाय
नियमित रूप से एक्सरसाइज करें। एक सप्ताह में 150 मिनट या ढाई घंटे एक्सरसाइज करना स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है।
ध्यान, योग और डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज से शांत रहने की कोशिश करें।
पोषक भोजन का सेवन करें। जिसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, मिनरल और विटामिन संतुलित मात्रा में हों।
अपने भोजन में ज्यादा मात्रा में फल और सब्जियों को शामिल करें।
अनिद्रा थकान का प्रमुख कारण है। अपने सोने और उठने का एक नियत समय बनाएं।
कैफीन का सेवन कम करें। कैफीन सिर्फ चाय, कॉफी में ही नहीं, कईं कोला ड्रिंक, पेन किलर और एनर्जी ड्रिंक्स में भी होता है।
अपने शरीर को ऊर्जा देने के लिए हर तीन से चार घंटे में कुछ खाएं।
अपना भार औसत रखें। सामान्य से अधिक भार से आपके दिल पर ज्यादा दबाव पड़ता है और आप जल्दी थक जाते हैं।
तनाव आपकी बहुत सारी ऊर्जा को खा जाता है। रिलेक्स रहने से आपकी ऊर्जा का स्तर बढ़ जाता है।
शराब का सेवन कम करें। अगर आप पूरे आठ घंटे सो जाएंगे तब भी आप अगले दिन थकावट महसूस करेंगे।
पानी की कमी से भी आप थकान महसूस करते हैं। एक गिलास पानी आप में ऊर्जा का स्तर बढ़ा देगा,
विशेषकर एक्सरसाइज करने के बाद। 
तुरंत एनर्जी के लिए सादा पानी पिएं, अगर थकान के साथ भूख भी लग रही हो तो केला खाएं।
नियत समय और अंतराल पर खाएंगे तो आपका शरीर उस अंतराल में ऊर्जा के स्तर को बनाए रखता है, क्योंकि वह जानता है कि अगला भोजन कब आएगा।
नाश्ता आपको पूरे दिन सक्रिय बने रहने के लिए ऊर्जा देता है। ऐसा नाश्ता करें, जिसमें प्रोटीन और फाइबर की मात्रा अधिक और शूगर व वसा की मात्रा कम हो।   
अत्यधिक शारीरिक श्रम से बचें, इससे शरीर में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन कार्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है।

आयरन की कमी बढ़ाती है थकान
थकान का सबसे सामान्य चिकित्सकीय कारण है आयरन की कमी यानी एनीमिया। यह 20 में से एक पुरुष और मेनोपॉज के स्तर को पहुंच चुकी महिलाओं में होता है, लेकिन यह समस्या उन महिलाओं में 25-30 प्रतिशत अधिक होती है, जिन्हें पीरियड्स होते हैं। गर्भवती महिलाएं भी आमतौर पर एनीमिया से पीडित होती हैं। अगर महिलाएं प्रतिदिन 18 मिलिग्राम और पुरुष 8 मिलिग्राम से कम आयरन ले रहे हैं तो उनके शरीर को ठीक तरह से काम करने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। मांस, हरी पत्तेदार सब्जियां आयरन के अच्छे स्त्रोत हैं। आयरन हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए जरूरी है। हीमोग्लोबिन का स्तर सीधेतौर पर हमारे ऊर्जा के स्तर को प्रभावित करता है, क्योंकि इसकी कमी से अंगों को ऑक्सीजन कम मिलती है। पुरुषों के लिए हीमोग्लोबिन का स्तर 14-18 ग्राम/डीएल और महिलाओं में इसकी मात्रा 12-16ग्राम/डीएल होना चाहिए।

क्या होती है सर्दियों की थकान
सर्दियों में दिन छोटे और रातें बड़ी हो जाती हैं, और आपके जागने और सोने का चक्र गड़बड़ा जाता है, जिससे थकान होती है। सर्दियों में सूरज की रोशनी कम होने का अर्थ है कि आपका मस्तिष्क ज्यादा मात्रा में मेलैटोनिन हार्मोन बना रहा है, जो आपको उनींदा बनाता है, क्योंकि इस स्लीप हार्मोन का सीधा संबंध रोशनी और अंधेरे से होता है।

सर्दियों में जब सूरज जल्दी छिप जाता है तो हमारा मस्तिष्क मेलैटोनिन बनाने लगता है, जिससे सांझ ढलते ही हमारा सोने का मन करता है। हम जल्दी बिस्तर में जाना चाहते हैं। सर्दियों में हमारी शारीरिक सक्रियता भी थोड़ी कम हो जाती है। हम थका-थका सा महसूस करते हैं। कभी-कभी यह थकावट और आलस गंभीर विंटर डिप्रेशन का संकेत भी हो सकती है। इसे चिकित्सकीय भाषा में सीजनल अफेक्टिव डिस्ऑर्डर कहते हैं।
हर पंद्रह में से एक व्यक्ति विंटर डिप्रेशन का शिकार होता है। यही वजह है कि सर्दियों में आत्महत्या के मामले बाकी मौसमों के मुकाबले बढ़ जाते हैं। इसी कारण इसे आत्महत्याओं का मौसम भी कहा जाता है। इससे बचने के लिए जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके प्राकृतिकप्रकाश में रहें। विटामिन डी की कमी से भी थकावट होती है। सर्दियों में अपने भोजन में सोया उत्पादों, दुग्ध उत्पादों, अंडे, मांस और चिकन की मात्रा बढ़ा दें।

बच्चों में थकान
अनिद्रा से शरीर की जैविक क्रियाएं प्रभावित होती है और यही थकान का सबसे प्रमुख कारण है। पढ़ाई और अपेक्षाओं के बढ़ते बोझ ने बच्चों की नींद भी उड़ा दी है। माता-पिता भी इस बात को नहीं समझ पाते कि वह छोटी उम्र में ही उन्हें जीवन की प्रतिस्पर्धा में उतार कर उनका बचपन छीन लेते हैं, जिसके परिणाम स्वास्थ्य समस्याओं के रूप में सामने आते हैं।

थकान के कारण
अत्यधिक शारीरिक, मानसिक श्रम।
पोषक तत्वों की कमी।
अपर्याप्त नींद।
गले, छाती या आंत का संक्रमण।
टीबी या किडनी रोग।
रक्त कैंसर।
थाइरॉयड हार्मोन की गड़बड़ी।
एनीमिया।
विटामिन और मिनरल की कमी।
कई बच्चों में टॉन्सिल के बढ़ने से रात में उनकी नींद बार-बार टूटती है और वे थका-थका महसूस करते हैं।

कितने कारगर है एनर्जी ड्रिंक और सप्लीमेंट्स
कई लोग थकान महसूस होने पर एनर्जी ड्रिंक का सहारा लेते हैं, लेकिन एनर्जी ड्रिंक शूगर और कैफीन से भरपूर होते हैं, इसलिए ये आपको कुछ समय तक तो एनर्जी दे देते हैं। यह आपके लिए कई समस्याएं पैदा कर सकते हैं। ज्यादा कैफीन के सेवन से ब्लड प्रेशर हाई हो सकता है, जबकि शूगर वजन बढ़ाने का काम करती है।
मल्टीविटामिन गोलियां बिना डॉक्टर की सलाह के न लें। एक सामान्य नियम है कि भोजन से ही अपने विटामिन प्राप्त करें, गोलियों से नहीं। अपने भोजन में फलों और सब्जियों की मात्रा बढ़ा दें। यह विटामिन, मिनरल और फाइबर से भरपूर होते हैं।

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