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जल्द ही संसद में पेश होगा प्रसारण विधेयक

आप जब यह पद छोड़ रही हैं तो उस समय सरकार के नजरिये से आपको सबसे बड़ी प्राथमिकता क्या लगती है? एक प्रसारण नियामक की जरूरत है। इसे बनाना ही होगा। हम हर तरह से एक परिपक्व अर्थव्यवस्था बन रहे हैं तो इस मामले में क्यों पीछे रहें। सभी विकसित अर्थव्यवस्थाओं के पास स्वतंत्र और अधिकार प्राप्त प्रसारण नियामक संस्थाएं हैं। यह प्रसारण विधेयक का हिस्सा है और उम्मीद है कि संसद इस पर जल्द ही विचार करेगी। टेलीविजन के खबरिया चैनलों के लिए कंटेंट कोड बनाने का मसला अब कहां है? मेरी अध्यक्षता में जो समिति बनी थी उसने इसका मसौदा तैयार कर लिया है। यह दिल्ली उच्च न्यायालय में पेश भी कर दिया गया है। अदालत ने एक्शन टेकेन रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय ने अभी इस कोई अंतिम फैसला नहीं किया। यह फैसला होते ही मामला सिर चढ़ जाएगा। मंत्रालय ने हाल ही में टेलीविजन सामग्री की निगरानी के लिए एक सेल बनाया है। इसके पीछे क्या सोच है? यह दरअसल दसवीं पंचवर्षीय योजना का हिस्सा था। कई कारणों से यह लंबित पड़ा था। अभी यह सौ चैनल की निगरानी कर सकता है, इसमें 50 और चैनल की व्यवस्था जल्द ही हो जाएगी। इसका मकसद है दंगों जसे संवेदनशील दौर में सामग्री पर नजर रखना। जब भी प्रोग्रामिंग या विज्ञापन संहिता के उल्लंघन की कोई शिकायत आएगी तो इसका काम अंतरमंत्रालय समिति को वीडियो फुटेा उपलब्ध करना भी होगा। न्यूा ब्राडकॉस्टर एसोसिएशन का कहना है कि यह खबरिया चैनलों के लिए एक सरकारी नियामक का काम करगी, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है। हाल ही में खबर आई थी कि सरकार विदेशी समाचार पत्रिकाओं को शत-प्रतिशत विदेशी सामग्री के साथ भारतीय संस्करण प्रकाशित करने की क्षाजत देगी? ऐसा कोई प्रस्ताव मंत्रिमंडल के पास नहीं गया है। हमें ऐसे ढेर सार प्रस्ताव मिले हैं, लेकिन मंत्रालय ने उन पर कोई फैसला नहीं किया। यह माना जा रहा है कि अब खबरों के क्षेत्र से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अधिकतम सीमा को हटा लिया जाएगा? नहीं, उद्योग की तरफ से ऐसी कोई मांग नहीं आई है। हम कह चुके हैं कि उद्योग के विकास के लिए हम जरूरी कदम उठाएंगे, लेकिन उद्योग ने ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया। लेकिन विदेशी प्रकाशक इसमें काफी दिलचस्पी ले रहे हैं? हां वे जरूर मांग कर रहे हैं, लेकिन देश के भीतर कोई नहीं। मै इतना ही कह सकती हूं कि फिलहाल मंत्रालय न्यूा प्रिंट मीडिया के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं करने जा रहा। टेलकॉम रगुलेटरी अथारिटी ने समाचार प्रसारण मीडिया में विदेशी निवेश की सीमा 4ीसदी करने को कहा है। क्या यह होने जा रहा है? यह भी नहीं होने जा रहा। हमने ट्रांसमिशन और वितरण में 7ीसदी विदेशी निवेश की क्षाजत दी है। लेकिन यह मानना गलत है कि यह हर जगह होगा। टेलकॉम अथारिटी की यह भी सिफारिश थी कि जमीनी प्रसारण को भी निजी क्षेत्र के लिए खोलना चाहिए। क्या इस पर कोई विचार हुआ? मोबाइल टेलीविजन पर फैसला करते समय हमने इस पर भी विचार किया था। हमने इस पर प्रसार भारती का नजरिया भी मांगा है। क्योंकि इसके लिए प्रसार भारती को अपना इन्फ्रास्ट्रक्चर निजी क्षेत्र से साझा करना होगा। प्रसार भारती को इसका विरोध नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे उनकी आमदनी का रास्ता खुलेगा? हां, हम भी यही मानते हैं।

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