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जय शंकर प्रसाद की नई रचनाओं का पता चला

जय शंकर प्रसाद की नई रचनाओं का पता चला

कामायनी जैसी कालजयी कृति के रचयिता महाकवि जयशंकर प्रसाद के निधन के करीब 77 साल बाद हिन्दी साहित्य को उनके एक और नाटक और करीब चालीस कविताओं का पता चला है।

प्रकाशन संस्थान द्वारा सात खण्डों में प्रकाशित जयशंकर प्रसाद की रचनावली में पहली बार ये रचनायें शामिल की गयी हैं। इस रचनावली का लोकार्पण प्रख्यात आलोचक नामवर सिंह और सुप्रसिद्ध कवि अशोक वाजपेयी, केदार नाथ सिंह और जनसत्ता के संपादक ओम थाणवी द्वारा इंडिया हेवीटेट सेंटर में किया गया।

समारोह में भारतेन्दु के समकालीन लेखक प्रेमधन की रचनावली काभी लोकार्पण किया गया। जयशंकर प्रसाद रचनावली के सम्पादक और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में हिन्दी के प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश सिंह ने बताया कि जयशंकर प्रसाद ने 1911 में यानी आज से करीब 103 साल पहले वफ्रु वाहन नामक एक नाटक लिखा था, जिसके बारे में आज तक हिन्दी साहित्य को नहीं पता था।

चार अध्याय वाला यह नाटक महाभारत के पात्र वफ्रु वाहन को आधार बना कर लिखा गया था जो अर्जुन और चित्रांगदा का पुत्र था। यह नाटक चम्पू शैली में लिखा गया था, जिसमें गद्य और पद्य दोनों का मिश्रण समाहित है। सिंह ने बताया कि जयशंकर प्रसाद की चालीस और कविताओं का पता चला है जो अब तक उनके किसी भी कविता संग्रह में शामिल नहीं है। ये कविताएं 1909 से लेकर 1927 तक इंदु, हंस और मर्यादा जैसी पत्रिकाओं में छपी थी।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रसाद की महत्वपूर्ण कृति आंसू के दो संस्करणों का पता चला है, जिसमें काफी अंतर है। प्रसाद ने यह कृति 1923 में लिखी थी और इसे छपने के लिये मैथिलीशरण गुप्त को भेजी थी और 1926 गुप्त जी ने अपने प्रकाशन से प्रकाशित किया था। आंसू के पहले संस्करण में 126 छंद थे, लेकिन जब 1933 में प्रकाशित दूसरे संस्करण में प्रसाद ने 67 और नये छंद जोड़े थे।

सिंह ने बताया कि हमने इस रचनावली में आंसू के दोनों संस्करणों को शामिल किया है, ताकि पाठकों को पता चल सके कि इसमें कितना अंतर है।

इस कार्यक्रम के अंत में प्रकाशन संस्थान के हरिश्चंद्र शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि दोनों ग्रंथावलियों (जो सात खंडों में उपलब्ध हैं) में जयशंकर प्रसाद की लगभग सभी रचनाएं हैं। उन्होंने बताया कि हिंदी में पाठकों और शोध करने वालों के लिए यह एक पूर्ण ग्रंथावली है। उन्होंने कहा कि विभिन्न माध्यमों से इन रचनाओं का संग्रह किया गया है।  कार्यक्रम में जेएनयू और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र, शिक्षक और साहित्यकार मौजूद थे।

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