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तराई के जंगल होंगे 500 हिरणों का नया घर

तराई के जंगल होंगे 500 हिरणों का नया घर

उत्तर प्रदेश के प्राणि उद्यान में घूमने वाले 500 से ज्यादा हिरण अब तराई क्षेत्र के जंगलों में रहेंगे। शासन से मिले निर्देश पर प्राणि उद्यान के निदेशक ने यह फैसला लिया है। अब तक यहां से 15 हिरण बलरामपुर जिले में भेजे जा चुके हैं। प्रशासन ने इन हिरणों को भेजने के लिए विशेष प्रकार के 9 पिंजरे भी बनवा लिए हैं।

प्राणि उद्यान में विभिन्न प्रजातियों के लगभग 500 से ज्यादा हिरण खुले घूमते हैं। इन हिरणों के खाने और इलाज के लिए शासन किसी प्रकार का अतिरिक्त बजट नहीं देता है। उद्यान प्रशासन भी इनके लिए कोई इंतजाम नहीं करता। ये हिरण यहां पर उगने वाली घास आदि खाकर ही जीवित हैं। हिरणों द्वारा पौधे और घास आदि खाए जाने के कारण यहां के पार्क बंजर जमीन की तरह लगने लगे हैं।

इस परेशानी से निपटने के लिए निदेशक के. थॉमस ने शासन को पत्र लिखकर इन हिरणों को तराई के जंगलों और अन्य जिलों में भेजे जाने के लिए अनुमति मांगी थी। शासन ने काफी दिन के इंतजार के बाद इन हिरणों को यहां से भेजे जाने की अनुमति भी दे दी।

यहां के प्रशासन ने हिरनों को भेजने के लिए 25 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया है। इस बजट से अब तक 9 लकड़ी और लोहे के विशेष पिंजरे बनाए गए हैं। हिरणों को तराई के जंगलों और अन्य जिलों में भेजकर वहां सबसे पहले बाड़ों में रखा जाएगा।

स्वास्थ्य का परीक्षण करने के बाद उन्हें जंगलों में छोड़ा जाएगा। अब तक यहां से 15 हिरण दो चरणों में बलरामपुर जिले में भेजे जा चुके हैं। इन हिरणों को एक साल के अंदर चरणबद्ध तरीके से भेजा जाएगा। अभी सभी हिरणों को चिडिम्याघर स्थित हिरण सफारी में भेज दिया गया है।

थॉमस ने बताया कि प्राणि उद्यान हिरणों को चरणबद्ध तरीके से बलरामपुर से भेजा जा रहा है। यह प्रक्रिया सालभर में पूरी होगी।

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