DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

नाम भुनाने में लगे केजीएमयू के डाक्टर

लखनऊ। निज संवाददाता। केजीएमयू में हुए कैडेबर ट्रांसप्लांट में जबरन श्रेय लेने की होड़ में नया मोड़ आ गया है। बीते बुधवार को आनन-फानन में इस पूरे मामले पर केजीएमयू के अधिकारिक प्रवक्ता डॉ. अब्बास अली मेंहदी की तरफ से प्रेस रिलीज जारी की गई थी जिसमे अभियान के वास्तविक नायकों को पिछली कतार में स्थान दिया गया। जबकी पूरा श्रेय उन चिकित्सकों को दिया गया जो ऑपरेशन में शामिल ही नहीं थे।

इन नामों में वीसी और सीएमएस भी शामिल थे। केजीएमयू के प्रवक्ता के इस दरियादिली को कुलसचिव ने गंभीरता से लिया है। हिन्दुस्तान ने ‘डाक्टरों में श्रेय लेने की मची होड़’ को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। केजीएमयू के कुलसचिव योगेश कुमार शुक्ल ने खबर को संज्ञान में लेते हुए मामले की पड़ताल शुरू करा दी है। उन्होने कहा कि जो लोग ऑपरेशन में शामिल नहीं थे उनका नाम प्रेस रिलीज में नहीं जाना चाहिए था। इस बात के निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि बगैर कुलसचिव के संस्तुती के अब कोई भी रिलीज जारी नहीं होगी।

मंगलवार को केजीएमयू और पीजीआई की टीम ने सफल कैडेबर ट्रांसप्लान्ट किया। यह सफलता प्रदेश के चिकित्सा इतहिास में मील का पत्थर साबित होगा। ऑपरेशन सफल हुआ तो केजीएमयू के कई बड़े डाक्टरों में इसका श्रेय लेने की होड़ मच गई। हाशिए पर गया पीआरओकैडेबर के लिए ब्रेन डेड अवनीश के परिवारीजनों को सहमत कराने में केजीएमयू के एक पीआरओ का अहम योगदान रहा। पीआरओ सीतापुर का ही निवासी बताया जाता है। वह पीड़ित परिवार से पूर्व परिचित भी था।

उसने ही अंग प्रत्यारोपण विभाग के डॉक्टरों को मरीज के ब्रेन डेड होने की जानकारी दी। साथ ही जब डाक्टरों की टीम ब्रेन डेड अवनीश के परिवारीजनों को सहमत कराने में असफल रही तो इस जिम्मेदारी को पीआरओ ने ही निभाया। पीआरओ के इस प्रयास का ही परिणाम था कि अवनीश के परिवारीजन कैडेबर के लिए सहमत हो गए। पीआरओ की इस मेहनत को केजीएमयू के रिलीज में कोई स्थान नहीं मिला।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:नाम भुनाने में लगे केजीएमयू के डाक्टर