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इस रेल बजट में मिल सकता है ओवरब्रिज का तोहफा

 हाथरस। इस साल पेश होने वाले रेल बजट से लोगों को खासा उम्मीद है। चुनावों के कारण अनुमान लगाया जा रहा है कि किरायों में तो बढ़ोतरी नहीं ही होगी। इसके अलावा राहत भरे कई फैसले भी आ सकते हैं। हाथरस की जनता के लिए यह रेल बजट कुछ खास हो सकता है।

शहर की एक दशक पुरानी जाम की समस्या से लोगों को छुटकारा दिलाने की कवायद शुरु कर दी गई। तालाब चौराहे पर लगने वाले जाम को लेकर यहां ओवर ब्रिज के निर्माण को मंजूरी मिल सकती है। जेडआरयूसीसी एनसीआर के सदस्य अशोक कुमार ने इस बाबत रेलवे बोर्ड में प्रस्ताव रखा है। पिछले छह माह में उत्तर मध्य रेलवे के हाथरस जंक्शन स्टेशन पर दो प्रमुख ट्रेनों का ठहराव शुरू किया गया है। हाथरस जंक्शन के पास गांव हैथा रघुनाथपुर के रहने वाले अशोक कुमार द्वारा क्षेत्र के विकास के लिए कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं।

जेडआरयूसीसी उत्तर मध्य रेलवे के विशेष सदस्य होने के नाते उनके द्वारा लगातार अपने क्षेत्र की समस्याओं के निराकरण को पहल की जा रही है। हाल ही में नीलाचंल एक्सप्रेस का ठहराव को लेकर हाथरस सिटी स्टेशन पर उनके द्वारा एक प्रेस वार्ता की गई थी। जिसमें रेलवे से सम्बंधित शहर की अन्य समस्याओं के बारे में बातचीत की गई थी। जिसमें उन्हें तालाब चौराहे पर लगने वाले जाम की अहम समस्या से अवगत कराया गया। जिसे लेकर उन्होंने एक प्रस्ताव बनाकर रेलवे बोर्ड के समक्ष रखा है।

जिसमें इस साल जुलाई माह में पेश होने वाले बजट में इस ओवर ब्रिज को शामिल किया जाने की कवायद शुरु कर दी गई है। इस रेल बजट में शामिल होने व बाद में पास होने के बाद तालाब चौराहे पर ओवर ब्रिज का निर्माण शुरु हो सकेगा। हांलकि अब तक पूर्वोत्तर रेलवे से यहां ओवर ब्रिज निर्माण के लिए कई संगठनों द्वारा ओवर ब्रिज बनाने का आग्रह किया जा चुका है लेकिन हर बार पूर्वोत्तर रेलवे द्वारा इसके निर्माण के लिए जिला प्रशासन आदि को लागत का एस्टीमेट बनाकर दे दिया जाता है।

पूर्वोत्तर रेलवे द्वारा इस ओवर ब्रिज को प्राथना निर्माण के अंतर्गत लाया जा रहा है। जिसमें ओवर ब्रिज निर्माण में आने वाले खर्चा जिला प्रशासन को वहन करने के लिए कहा जाता है। यही कारण है कि आज तक किए गए सभी प्रयास ठंडेम् बस्ते में जा चुके हैं। जबकि अशोक कुमार अग्नहिोत्री द्वारा किए जा रहे प्रयास के सफल होने पर इसका पूरा खर्चा रेलवे ही वहन करेगी। इस बात की पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि इस बजट में अशोक के प्रस्ताव को शामिल कर इसे पास कर दिया जाएगा।

अगर ऐसा होता है तो निर्माण कार्य भी जल्द शुरु किया जा सकेगा। क्यों अटका है फाटक चौड़ीकरण का मामला?जाम के झाम से निपटने के लिए पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक से तालाब फाटक चौड़ीकरण की मांग की गई थी। जिस पर इज्जतनगर मण्डल द्वारा इसके लिए पचास लाख रुपए की मांग की गई। जिस जिला प्रशासन ने मौन साध लिया। ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब रेलवे ने किसी समस्या समाधान में लगने वाली लागत के लिए धनराशी की मांग की है।

फाटक चौड़ीकरण हो या ओवर ब्रिज का निर्माण सभी के लिए रेलवे द्वारा एस्टीमेट बनाकर प्रार्थी को प्रेषित किया गया है। ऐसे में प्रशासन के अलावा तमाम सांसद विधायक द्वारा अपनी निधि से लागत मूल्य देकर समस्या के निराकरण को आगे कदम नहीं उठाया गया है। फाटक चौड़ीकरण में ऐसा ही हुआ है। लागत मूल्य के देने से बेहतर समस्या के निस्तारण को अन्य साधनों के जरिए स्थानीय स्तर पर ही निर्माण कार्य कराने को सभी बेहतर समझते हैं। यह बात रेलवे भी अच्छी तरह जानता है जिस कारण हमेशा ही रेलवे द्वारा एस्टीमेट बना कर दिया जाता है।

इतना ही नहीं पूर्वोत्तर रेलवे ने तालाब फाटक से सम्बंधित किसी भी मामले को बोर्ड आदि के लिए प्रेषित भी नहीं किया है। जिस कारण दसियों साल से लोग तालाब चौराहे का जाम ङोल रहे हैं।

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