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हर दिन डेढ़ लाख सिगरेट से छलनी होता है सीना

गया। निज प्रतिनिधि। हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कैंसर के बढ़ते मरीजों पर चिंता व्यक्त की गयी थी। पिछले दिनों बोधगया में प्रसिद्ध सर्जन डा. अहमद अब्दुल हई ने बताया था कि सगिरेट पीना कैंसर का एक बड़ा कारण है।

दूसरी ओर अकेले गया जिले में हर दिन डेढ़ लाख सगिरेट की खपत है। सरकारी महकमे से लेकर एनजीओ तक तंबाकू से तौबा करने के लिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इस मुहिम में नामचीन हस्तियां लगी हुई हैं।

समय समय पर अभियान चलाकर लोगों को तंबाकू से परहेज करने की नसीहत दी जा रही है। फिर भी शौकीन लोगों के साथ-साथ युवा पीढ़ी तंबाकू की गिरफ्त से बाहर निकलता नहीं दिख रहा है। जागरूकता अभियान या अन्य किसी कारणों से गिने-चुने लोग इसे छोड़ते हैं जबकि इसे पकड़ने वालों की तादाद काफी ज्यादा है।

इसके सेवन से कैंसर होने की बात की जानकारी और जेब ढीली होने के बावजूद सगिरेट की लत वाले लोगों के अलावा युवा पीढ़ी इसके शौकीन होते जा रहे हैं। दूसरों स्थानों की तरह गया जिले के लोग भी सगिरेट के काफी शौकीन हैं।

यहां सगिरेट बिक्री के आंकड़े पर गौर करने पर पता चलता है कि जिले में लोग तंबाकू के प्रति कितने जागरूक हैं। जिले में हर दिन करीब एक लाख 68 हजार सिगरेट बिकते हैं। ये ब्रांडेड सहित छोटी-मोटी कंपनियों की होती हैं।

एक मशहूर कंपनी की खास सगिरेट की बिक्री हर दिन तीन से चार पेटी है। एक पेटी में 12 हजार सिगरेट होते हैं। इसके बाद दूसरे ब्रांडों की सगिरेट की मांग है। यहां एक अनुमान के अनुसार जिले के लोग हर दिन सगिरेट को पीकर करीब 8 लाख रुपए 40 हजार रुपए धुएं में उड़ा दे रहे हैं। इतनी मोटी रकम खर्च कर वे कैंसर जैसी बीमारी को न्यौता दे रहे हैं। पर्व-त्योहार और जाड़े के मौसम में यह आंकड़ा और ऊपर चढ़ता है।

शहर के टेकारी रोड के थोक और खुदरा कारोबारियों ने बताया कि सूबे में ज्यादा टैक्स लगने के कारण वे लोग ज्यादा सगिरेट झारखंड से मंगाते हैं। जाड़े के मौसम में सगिरेट की मांग में करीब बीस फीसदी का इजाफा हो जाता है।

जिले में हर दिन एक कंपनी की करीब 95 हजार पीस (आठ पेटी) सगिरेट की मांग है। जाड़े के मौसम में मांग का ग्राफ ऊपर चढ़ता है। देवेन्द्र प्रसाद, थोक कारोबारी, टेकारी रोड गया यह सिद्ध है कि सगिरेट से कैंसर होता है।

इसके अलावा हृदय के लिए यह काफी घातक है। युवाओं में सगिरेट में गांजा डालकर पीने का रूझान बेहद चिंताजनक है। इस रूझान को खत्म करने के लिए जागरूकता अभियान जरूरी है। डा. एस जेड अहसनउपाधीक्षक, जयप्रकाश नारायण अस्पताल गया।

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