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प्रदेशभर के 41 संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति निरस्त

इलाहाबाद। वरिष्ठ संवाददाता। सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ा रहे प्रदेशभर के 41 संस्कृत शिक्षकों का चयन निरस्त हो गया है। इनकी जगह दूसरे अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया है। यह उलटफेर लिखित परीक्षा में गलत सवालों को हटाने के बाद उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से जारी टीजीटी 2010 संस्कृत के संशोधित परिणाम में हुआ।

बोर्ड के सर्वाधिक विवादित अध्यक्ष रहे डॉ. आरपी वर्मा के कार्यकाल में चयनित इन 41 शिक्षकों को अब नोटिस देने की तैयारी है। दरअसल चयन बोर्ड ने टीजीटी के 257 पदों पर भर्ती के लिए 8 अक्टूबर 2010 को विज्ञापन जारी किया था। इसकी लिखित परीक्षा 13 फरवरी 2011 को हुई। अंतिम परिणाम 18 फरवरी 2012 को आया। आनन-फानन में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति भी दे दी गई। उधर, असफल अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा के 11 सवालों पर आपत्ति करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।

हाईकोर्ट के निर्देश पर चयन बोर्ड ने विवादित प्रश्नों पर विशेषज्ञों की राय ली तो नौ सवाल वास्तव में गलत मिले। इस पर हाईकोर्ट ने लिखित परीक्षा का परिणाम संशोधित करके रिजल्ट जारी करने का निर्देश दिया। याची संतोष कुमार तिवारी के अधविक्ता सीमांत सिंह ने बताया कि बुधवार को कैविएट दाखिल कर दी गई है ताकि संशोधित रिजल्ट के खिलाफ याचिका होने पर उनका पक्ष भी सुना जाए। कृषि के 9 शिक्षकों का चयन भी निरस्तटीजीटी 2010 कृषि का रिजल्ट भी संशोधित हुआ है। इस विषय में भी नौ चयनित शिक्षकों को हटा दिया गया है। दरअसल फरवरी 2012 में घोषित रिजल्ट पर कोटे में धांधली के आरोप लगे थे। सामान्य, ओबीसी और एससी कैटगरी के जितने पद विज्ञापन में थे, अंतिम परिणाम में उनकी संख्या उतनी नहीं थी।

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