DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कच्ची कॉलोनियों पर भी फंसी हुई शीला सरकार

नई दिल्ली, वरिष्ठ संवाददाता। दिल्ली की कच्ची कॉलोनियों पर भी शीला सरकार फंसी हुई है। कांग्रेस सरकार को घेरने के लिए नई सरकार ने लोकायुक्त रिपोर्ट को आधार बनाया है। और मामले में राष्ट्रपति तक से जांच की सिफारशि कर दी है। यह रिपोर्ट सामने आने से शीला सरकार की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। तर्क यह दिया गया था कि कांग्रेस सरकार ने चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ पाने के लिए यह पहल की थी। कॉलोनियों के नविासियों को अस्थाई प्रमाणपत्र जारी किए गए थे।

इसे लोकायुक्त गलत माना था और सरकार से जांच कराए जाने के आदेश दिए गए थे। इस मामले में भाजपा नई सरकार पर एक के बाद एक जांच के आदेश हो रहे हैं। इससे सरकार द्वारा राजनीतिक दलों को घेरा जा रहा है। इसे भी नई सरकार का बड़ा हथियार माना जा रहा है क्योंकि यह मामला इन कॉलोनियों में रहने वाले लाखों लोगों से संबंधित है। 6 नवम्बर 2013 को क्या कहा था लोकायुक्त नेलोकायुक्त मनमोहन सरीन का कहना था कि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने राजनीतिक फायदा हासिल के लिए अस्थाई प्रमाणपत्र बांटे थे।

ये प्रमाणपत्र 2008 में बांटे गए थे। ये आदेश भाजपा विधायक दल के नेता डॉ. हर्षवर्धन द्वारा की गई शिकायत पर जारी किए गए थे। शिकायकर्ता का कहना था कि मतदाताओं को लुभाने की मंशा से यह कदम उठाया गए थे। सरीन का कहना था कि हमने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि वे इस संबंध में सलाह दें कि वे कथित चुनाव से पूर्व इन तोहफों को बांटना बंद करें।

क्या है स्थितिः 1639 कॉलोनियों रिकार्ड में कच्ची पाई गई थी 1218 कॉलोनियों को अस्थाई प्रमाणपत्र सौंपे गए थे733 कॉलोनियों पर किसी एजेंसी को कोई आपत्ति नहीं थी895 कॉलोनियों को नियमित किया जाने का दावा हैक्या था मामलादिल्ली की कच्ची कॉलोनियों को पक्का करने के लिए सरकार ने प्रक्रिया शुरू की थी।

इसके लिए कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी के माध्यम से अस्थाई प्रमाणपत्र जारी कराए गए थे। 2008 में छत्रसाल स्टेडियम शुरू की गई इस योजना के तहत 1639 कॉलोनियों को नियमित किए जाने के लिए अस्थाई प्रमाणपत्र दिए गए थे। मामले में शिकायतकर्ता का कहना था कि इन कॉलोनियों में से एक भी कॉलोनी नियमित नहीं की गई थी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:कच्ची कॉलोनियों पर भी फंसी हुई शीला सरकार