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साधन और साध्य

साधन और साध्य के बीच दूरी बढ़ती रही है। वह भी इसे लेकर उलझन में थे कि लक्ष्य प्राप्त करने के लिए उन्हें अच्छाई का रास्ता अपनाना चाहिए या नहीं? वह अक्सर पाते हैं कि अच्छाई के रास्ते से उतरकर वे सभी चीजें पाई जा सकती हैं, जो अभी उनके पास नहीं हैं। वे अच्छाई और कामयाबी के बीच के संबंध को लेकर ऊहापोह में हैं।
हाउ मैन मेजर्स सक्सेस के लेखक जिम स्मोक कहते हैं कि एक आम व्यक्ति के लिए बेहतर जिंदगी का अर्थ आर्थिक आत्मनिर्भरता, ताकत, लोकप्रियता और प्रतिष्ठा जैसी चीजें हैं, जो उसके पास नहीं हैं और दूसरे के पास हैं। ये सभी उसे इस बात को स्वीकार करने के लिए प्रेरित करती हैं कि दूसरा व्यक्ति सफल है। इस सोच के साथ ही सफलता एक परदे का काम करती है, जो सफल व्यक्ति की सारी बुराइयों को ढक देती है।

आज साधन की पवित्रता एक बार फिर चर्चा में है। सचिन तेंदुलकर की महानता के कारण उनके द्वारा बटोरे गए रन ही नहीं हैं, बल्कि यह भी है कि उन्होंने खेल को खेल की तरह खेला, जंग की तरह नहीं। वह इस विचार से कभी सहमत नहीं हुए कि खेल और जंग में सब कुछ जायज है। उनके उलट कई महान खिलाड़ी ऐसे हैं, जिन्हें उनके खेल के कारण याद तो किया जाएगा, लेकिन उसके साथ ही उनके बुरे व्यवहार की भी चर्चा होगी। वारेन बफेट ने कहा है कि पैसा, प्रसिद्धि और शक्ति हासिल करने से कई गुणा कठिन है अपनी अच्छाइयों को बनाए रखना। जेब में हजारों डॉलर हो, मगर किसी नेत्रहीन को सड़क पार कराते समय हम दो बार सोचें, तो सारी संपदा बेकार है। अच्छाई हासिल करना मुश्किल भले हो, लेकिन यह किसी अर्हता की मांग नहीं करती। जब भी कोई काम करें, इस दर्शन को याद रखें कि हमारे विचारों में, कार्यों में और व्यवहार में, जो कुछ भी अच्छा होता है, वह हमारी ओर पलटकर जरूर आता है।

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