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क्यों होता है दर्द ?

मानव शरीर में नसें बिजली की तारों की तरह आपस में जुड़ी होती हैं, जो किसी भी हिस्से में दर्द या फिर चोट का संदेश तुरंत मस्तिष्क तक पहुंचाती हैं। शरीर के सभी हिस्सों में फैली इन नसों के क्षतिग्रस्त होने, रक्त का संचरण बाधित होने या फिर नस के फटने के कारण दर्द होता है। दर्द क्या है और कुछ खास तरह के दर्द के पीछे मुख्य वजह क्या हो सकती है, बता रही हैं शमीम खान

दर्द है तो दर्द का कारण भी होगा। यह कारण शारीरिक और मानसिक दोनों स्तर पर हो सकता है। संक्रमण, चोट, रिएक्शन, सूजन, रक्त संचरण में बाधा, जलन और तनाव सभी अपने-अपने स्तर पर शरीर के विभिन्न हिस्सों पर अपना प्रभाव डालते हैं, जो दर्द का कारण बनते हैं। दर्द के शारीरिक लक्षण भी दिखाई देते हैं, जैसे उल्टी होना, चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना, उनींदा महसूस होना आदि। भावनात्मक स्तर पर यह दर्द क्रोध, अवसाद, मूड बदलने या चिड़चिड़ेपन के रूप में देखा जा सकता है। दर्द को ठीक करने के लिए जहां दर्द निवारक दवाएं दी जाती हैं, वहीं एक्यूप्रेशर और सुजोक जैसी पद्धतियों में खासतौर पर दर्द के खास बिंदुओं पर दबाव उत्पन्न कर रक्त संचरण को नियमित किया जाता है। 

कैसे होता है दर्द का अहसास
मानव शरीर में नसें बिजली की तारों की तरह आपस में जुड़ी होती हैं, जो किसी भी हिस्से में दर्द या फिर चोट का संदेश तुरंत मस्तिष्क तक पहुंचाती हैं। शरीर के सभी हिस्सों में फैली इन नसों के क्षतिग्रस्त होने, रक्त का संचरण बाधित होने या फिर नस के फटने के कारण दर्द होता है। अधिकतर दर्द ऊतकों के नष्ट या क्षतिग्रस्त होने की वजह से होता है, जो आपको दर्द, टीस या धुकधुक के रूप में महसूस होता है। संक्रमण, शरीर में कोई खास बीमारी व उसका उपचार, शारीरिक चोट जैसे कटना और हड्डी व मांसपेशियों का क्षतिग्रस्त होना शरीर के ऊतकों को नुकसान पहुंचाता है। दर्द की तीव्रता अलग-अलग व्यक्तियों में अलग-अलग हो सकती है।

दर्द के प्रकार 
स्थायी दर्द:
डॉक्टरी भाषा में इसे क्रॉनिक पेन कहते हैं, जो समय के साथ बढ़ता जाता है। यह अस्थायी दर्द की तुलना में अधिक समय तक रहता है। यह  हल्का या तीव्र हो सकता है। इसका कारण कोई लंबी बीमारी भी हो सकती है। 
अस्थायी दर्द: डॉक्टरी भाषा में इसे एक्यूट पेन कहा जाता है। यह तुरंत और थोड़े समय के लिए होता है। यह किसी चोट, बीमारी, सूजन या ऊतकों को चोट लगने के कारण होता है। जब घाव भर जाता है, तब दर्द भी चला जाता है। इसे आसानी से पहचान कर उपचार किया जा सकता है।

दर्द का उपचार
दर्द के कारण का पता लगा कर ही उसका उपचार किया जाता है, जैसे संक्रमण है तो एंटीबायोटिक्स लेने से दर्द चला जाता है। चोट लगी है तो दर्द निवारक दवाएं लेना अच्छा रहता है। कैंसर, हड्डी टूटने या जलने आदि स्थितियों में दूसरी दवाओं के साथ दर्द निवारक दवाएं भी दी जाती हैं। साइकोसोमैटिक पेन को मनोचिकित्सकीय तरीके से ठीक करने का प्रयास किया जाता है। शरीर की अंदरूनी समस्याओं के कारण उपजे दर्द का पता लगाने के लिए टेस्ट, एक्स रे, सोनोग्राफी आदि का सहारा लिया जाता है और उसी के अनुसार उपचार सुझाया जाता है।

दर्द कैसे-कैसे
दिल की धमनियों का दर्द

दिल की धमनियों के दर्द को पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज (पीवीडी) कहा जाता है। हृदय से जुड़ने वाले शरीर के आंतरिक अंग और मस्तिष्क को खून पहुंचाने वाली धमनियों में खून का संचरण बाधित होने से दर्द होता है। दिल में ही नहीं, शरीर के किसी भी हिस्से में धमनियां अवरुद्ध  होने पर हृदयघात हो सकता है।

क्या करें: पीवीडी की स्थिति अचानक पैदा नहीं होती। अधिक वसा, अनियमित खानपान और व्यायाम की कमी से धमनियों का आंतरिक घेरा छोटा होने लगता है।  विशेषज्ञों की सलाह से इन पक्षों पर ध्यान देना चाहिए।

साइकोजेनिक पेन
अक्सर दर्द की उत्पत्ति तो ऊतकों के नष्ट होने या तंत्रिकाओं के क्षतिग्रस्त होने पर होती है, पर  इसके कारण जो दर्द होता है, वह भय, अवसाद, तनाव या उत्तेजना के कारण बढ़ जाता है। कुछ  मानसिक रोगों में लोग ठीक तरह से नहीं खाते और पूरी नींद नहीं ले पाते , जिससे विभिन्न हिस्सों में दर्द होता है।  

न्यूरोपैथिक पेन
यह दर्द तंत्रिकाओं के नष्ट होने से होता है। तंत्रिकाएं किसी बीमारी जैसे मधुमेह, स्ट्रोक या एचआईवी के संक्रमण से नष्ट हो सकती हैं। कीमोथेरेपी से भी तंत्रिकाएं क्षतिग्रस्त होती हैं। तंत्रिकाओं के नष्ट होने से जो दर्द होता है, वह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है, जिसमें मस्तिष्क व रीढ़ की हड्डी पर असर होता है। यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को संकेत भेजने वाली पेरिफेरल तंत्रिकाओं के नष्ट होने से भी होता है।

रेफर्ड पेन
इसे रिफ्लेक्टिव पेन भी कहा जाता है। जब दर्द चोट वाली जगह के पास या उससे दूर होता है तो इसे रेफर्ड पेन कहा जाता है। जैसे, जब एक व्यक्ति को हार्ट अटैक होता है, तब प्रभावित क्षेत्र जरूर हृदय होता है, पर दर्द छाती की बजाए कंधों और गर्दन के पास भी होता है। 

छाती में दर्द
हृदय संबंधी समस्याओं के अलावा छाती में दर्द के कुछ और संभावित कारण भी हो सकते हैं। यह आपके फेफड़ों में संक्रमण, इसोफैगस, मांसपेशियों, पसलियों या तंत्रिकाओं की किसी समस्या के कारण हो सकता है। आप गर्दन के निचले हिस्से से लेकर पेट के ऊपरी हिस्से तक कहीं भी छाती के दर्द को अनुभव कर सकते हैं।

टेल बोन पेन
गर्दन से कूल्हे को जोड़ने वाले मेरूदंड के निचले हिस्से में होने वाले दर्द को टेल बोन पेन कहते हैं। शारीरिक रूप से कमजोर लोगों में यह दर्द अधिक देखा जाता है। कई बार एक ही जगह बैठे रहने पर भी टेल बोन की समस्या देखी गई है, जबकि कई में जन्मजात विकृति इसका कारण है।

क्या करें: मसाज थेरेपी, दवा तेल, सूक्ष्म, सर्जरियों से भी टेल बोन का इलाज किया जाता है। टेल बोन के दर्द के कारण जब पेट के निचले हिस्से में दर्द होता है, तब केवल सर्जरी ही एकमात्र उपचार बचता है।

सिरदर्द
सिरदर्द दुनिया की सबसे आम बीमारी है। इस रोग की उत्पत्ति का वास्तविक कारण स्पष्ट नहीं है, फिर भी तनाव, अवसाद, एल्कोहल का अधिक मात्रा में सेवन, कब्ज, थकान, शोरगुल या तंत्रिका तंत्र की गड़बड़ी, ब्रेन ट्यूमर आदि के कारण यह हो सकता है। सिरदर्द की समस्या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में अधिक होती है। दूसरा सबसे ज्यादा मिलने वाला सिरदर्द माइग्रेन है। आंकड़ों के अनुसार तकरीबन 10 प्रतिशत आबादी किसी ना किसी रूप में माइग्रेन से पीड़ित है।

क्या करें: समय पर सोएं और जागें। रात को जल्दी सोने और सुबह जल्दी उठने की कोशिश करें। समय पर भोजन करें, लंबे उपवास से बचें। संतुलित व पौष्टिक भोजन लें। किसी भी तरह के तनाव और अवसाद से बचें।

साइकोसोमैटिक पेन
कई बार हमें कोई शारीरिक समस्या नहीं होती, तब भी हमारे शरीर के किसी हिस्से में दर्द होने लगता है। इसे साइकोसोमैटिक पेन कहते हैं। यह शब्दावली उन दर्दों के लिए उपयोग की जाती है, जिनमें मन की परेशानी शारीरिक रूप से प्रदर्शित होती है।

जोड़ों का दर्द
जोड़ों का दर्द बोन फ्लूइड या मेम्ब्रेन में परिवर्तन आ जाने, चोट लगने या अंदर किसी बीमारी के पनपने से हो सकता है। उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों के बीच के कार्टिलेज कुशन को लचीला और चिकना बनाए रखने वाला लुब्रीकेंट कम होने लगता है। लिगामेंट्स भी क्षतिग्रस्त होते हैं, जिससे जोड़ अकड़ जाते हैं।

क्या करें: नियमित कसरत करें। इससे हड्डियां मजबूत होती हैं और अस्थि क्षरण भी कम होता है। डेयरी उत्पादों का सेवन अधिक करें। नियमित समय पर भोजन करें। हरी सब्जियों, साबुत अनाज और फलों का सेवन करें। 

कमर दर्द
हमारी रीढ़ की हड्डी में 32 वर्टिब्रे होती हैं, जिनमें से 22 गति करती हैं। जब इनकी गति अपर्याप्त होती है या ठीक नहीं होती तो कई सारी समस्याएं हो जाती हैं। रीढ़ की हड्डी के अलावा हमारी कमर की बनावट में कार्टिलेज (डिस्क), जोड़, मांसपेशियां, लिगामेंट आदि शामिल होते हैं। इसमें किसी के भी विकारग्रस्त होने से कमर दर्द हो सकता है। इससे खड़े होने, झुकने, मुड़ने में बहुत तकलीफ होती है।

क्या करें: जीवनशैली में बदलाव लाएं। पोषक भोजन खाएं, विशेषकर ऐसा भोजन, जो कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर हो। शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। नियमित रूप से एक्सरसाइज और योग करें। शरीर का पॉश्चर ठीक रखें। गलत पॉश्चर कमर दर्द का प्रमुख कारण है। शरीर का भार कम रखें और कमर के आसपास चर्बी न बढ़ने दें। 
(प्रोफेसर जुगल किशोर, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, दिल्ली से बातचीत पर आधारित।)

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