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किडनी स्टोन के बारे में यह जानना है जरूरी

खान-पान की गलत आदतें और पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना मुसीबत में डाल सकता है। यह किडनी में पथरी होने का मुख्य आधार भी हो सकता है। पेट की निचली तरफ अचानक तेज दर्द होने के साथ पेशाब के समय जलन होना या जी मिचलाना किडनी में पथरी का संकेत हो सकता है। पथरी, एक या दोनों ओर की किडनी में हो सकती है। कुछ में यह पेशाब के दौरान बाहर निकलने के बाद दोबारा भी बनती रहती है। खास यह है कि इन दिनों यह समस्या ऐसे युवाओं में अधिक मिल रही है, जिनके परिवार में ऐसा इतिहास नहीं रहा है। लंबे समय तक पथरी का उपचार न कराने पर किडनी की सुचारू प्रक्रिया में कमी आ सकती है, साथ ही कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। 


क्या होती है पथरी
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के डॉ. अतुल गोस्वामी के अनुसार, अधिकतर पथरी का कारण किडनी में कुछ खास तरह के साल्ट्स का जमा होना है। पहले स्टोन का छोटा खंड (निडस) बनता है, जिसके चारों ओर सॉल्ट जमा होता रहता है। पुरुषों में महिलाओं की तुलना में पथरी होने की आशंका अधिक होती है। जेनेटिक कारण, हाइपरटेंशन, मोटापा, मधुमेह और आंतों से जुड़ी कोई अन्य समस्या होना भी पथरी की वजह बन सकता है।

खान-पान की गलत आदतें और अस्त-व्यस्त जीवनशैली
- पानी की कमी से पेशाब गाढ़ा और गहरे पीले रंग का हो जाता है। शरीर द्वारा कैल्शियम का सही अवशोषण न होने के कारण सॉल्ट जमने और पथरी के कण बनने की आशंका बढ़ जाती है।
- प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन भी पथरी का कारण बन सकता है। इनमें सोडियम की अधिकता होती है, जिससे कैल्शियम का अधिक उत्सर्जन होने लगता है। यानी पेशाब में सोडियम की मात्रा तो बढ़ती ही है, साथ ही यह कैल्शियम उत्सर्जन का कारण भी बन जाता है। प्रोसेस्ड फूड में फाइबर की कमी भी कैल्शियम ऑक्जेलेट और यूरिक एसिड की प्रक्रिया में बाधा बनती है।
- अधिक सॉफ्ट ड्रिंक्स का सेवन भी यूरिन में ऑक्जलेट्स के स्तर को बढ़ा देता है। अधिक सॉफ्ट ड्रिंक्स व कैफीनयुक्त पेय पदार्थों का सेवन शरीर के द्वारा कैल्शियम को ग्रहण करने की क्षमता को कम कर देता है। ऐसे में कैल्शियम के उत्सजर्न की आशंका बढ़ती है, जो पथरी का कारण बनती है।
- मोटापे के कारण पानी पीने की मात्रा और शारीरिक सक्रियता घट जाती है। शरीर में एसिडिक यूरिन अधिक बनता है।
- आसानी से उपलब्ध ओसीटी दवाएं जैसे लेक्सेटिव, कुछ खास सॉल्ट के साथ एंटासिड और एफेड्रिन आदि अधिक लेने से स्टोन होने की आशंका बढ़ जाती है।

पथरी की जांच और उपचार
- मरीज के लक्षण के आधार पर जांच का तरीका तय किया जाता है। रेडियोलॉजिकल इन्वेस्टिगेशन्स जैसे एक्सरे, अल्ट्रा-सोनोग्राफी या कम्यूटराइज्ड टोमोग्राफी (सीटी) के जरिए पथरी की पुष्टि की जाती है। इनमें से सीटी स्कैन सबसे मानक माना जाता है।
- पथरी का उपचार इसके आकार और जगह पर निर्भर करता है। चार एमएम से कम की पथरी अपने आप या कुछ दवाओं के जरिए यूरिन के रास्ते बाहर निकल जाती है। इसके अलावा मूत्र मार्ग में निचली तरफ आ चुके स्टोन के लिए यूरेट्रोस्कॉपी की जाती है। गुर्दे और ऊपर की ओर के स्टोन के लिए लीथोट्राइप्सी को अपनाया जाता है। किडनी का आकार बढ़ने पर नेफ्रोलिथोटॉमी को अपनाया जाता है। रेट्रोग्रेड इंट्रा रेनल सजर्री का उपयोग सभी तरह की सजर्री के लिए किया जा सकता है। इसमें एक लचीले यूरेट्रोस्कोप को यूरेथ्रा (मूत्र नली) के जरिए अंदर प्रवेश कराया जाता है। पथरी को चिह्न्ति करके लेजर के जरिए उसे रेत की तरह छोटे-छोटे कण में तोड़ दिया जाता है। ये कण बाद में अपने आप निकलते चले जाते हैं। इस तरीके के कई फायदे हैं, खून कम बहता है, किडनी को नुकसान नहीं होता, दर्द कम होता है और कम समय के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है। इसकी सफलता दर भी अधिक है।

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