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आईआईटी में आत्महत्या की जांच का नतीजा जीरो

आईआईटी कानपुर में पढ़ने वाले एक और मेधावी छात्र की कल हुई मौत की घटना इस वर्ष हुआ ऐसा दूसरा मामला है जबकि वर्ष 2005 से हुई ऐसी ग्यारहवीं घटना है जिसमें या तो किसी छात्र ने आत्महत्या की है या उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है।

इस घटना की जांच के लिए संस्थान के अधिकारियों ने एक पांच सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है जो आज से ही काम करना शुरू भी कर देगी।

अब तक हुई ऐसी घटनाओं की जांच के लिए हालांकि कई समितियों का गठन हो चुका है लेकिन, इनका अभी तक नतीजा नहीं मिला है।

गौरतलब है कि कर्नाटक के रायचूर जिले के रहने वाला छात्र मंजूनाथ (20) बीटेक कंप्यूटर साइंस थर्ड ईयर का छात्र था। वह कैम्पस के हाल नंबर पांच हास्टल में रहता था। उसकी कल सुबह अपने हास्टल के कमरे में लाश मिली थी। आईआईटी प्रशासन के अनुसार वह पिछले काफी समय से डिप्रेशन का शिकार था और उसका इलाज कैम्पस में ही चल रहा था। इसके अलावा मंजूनाथ पोलियो के कारण पैर से विकलांग था। उसके पिता की बचपन में ही मौत हो गयी थी तथा अभी दो महीने पहले उसकी इकलौती बहन की भी मौत हो गयी थी। वह काफी गरीब घर का छात्र था और उसके कमरे से कुछ जहरीला पदार्थ और नींद की गोलियां मिली थीं। पुलिस ने पोस्टमार्टम में भी उसकी आत्महत्या का कारण जहरीले पदार्थ का सेवन बताया था।

आईआईटी कानपुर के निदेशक (डायरेक्टर) इन्द्रनील मन्ना ने बताया कि आज सुबह मंजूनाथ की माता कर्नाटक से आ गयी थी और उन्होंने उसके अंतिम संस्कार की इच्छा कानपुर में ही करने की इच्छा जताई थी आज सुबह उसका अंतिम संस्कार कानपुर में पूरे रीति रिवाज के साथ कर दिया गया। 

इससे पहले इस वर्ष एक जनवरी को आईआईटी में बीटेक सेकंड इयर के छात्र आंध्र प्रदेश के गोपारप्पू साई कुमार की मौत हो गई थी और इसके लिये गठित जांच समिति की रिपोर्ट अभी तक आई नहीं है। गोपारप्पू साई कुमार का शव एक जनवरी को संस्थान के निकट रेलवे लाइन के पास मिला था।

आईआईटी के निदेशक ने बताया कि कल हुई मंजूनाथ की मौत की जांच के लिये एक पांच सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया गया है जिसमें तीन प्रोफेसर और दो छात्र शामिल किये गये हैं। समिति जल्दी ही अपनी रिपोर्ट देगी। डायरेक्टर मन्ना से पूछा गया कि एक माह पहले हुई गोपारप्पू साई कुमार की संदिग्ध मौत के मामले में भी गठित पांच सदस्यीय समिति की रिपोर्ट में क्या नतीजा आया, तो उन्होंने कहा कि अभी तक उस जांच समिति की रिपोर्ट नहीं आयी है।

उन्होंने बताया कि अब संस्थान और पुलिस तो यह लगभग मान चुकी है कि एक माह पहले गोपारप्पू के साथ दुर्घटना हुई थी क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके सिर में चोंट आई थी हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि पिछले आठ साल में हुई इस ग्यारहवीं (11वीं) संदिग्ध मौत की तथ्यान्वेषण समिति की जांच का नतीजा भी वैसा ही निकलने की उम्मीद है जैसा कि पिछले आठ सालों में हुई मौतों के बाद गठित समितियों का निकला था।

आईआईटी में हो रही छात्रों की संदिग्ध मौतों के लिये बनी तथ्यान्वेषी समिति की रिपोर्ट के नतीजों के संबंध में डाले गई एक आरटीआई आवेदन के जवाब में आईआईटी ने बताया था कि पिछले पांच सालों (2005 से 2010) के दौरान आठ छात्र छात्राओं ने आत्महत्या की और 2010 से 2014 तक तीन और छात्र-छात्राओं की संदिग्ध मौत हुई है। 

सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार संस्थान में पांच सालों में 2005 से 2010 तक जिन आठ छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या की है उनमें से पांच छात्र-छात्राओं ने अपने अपने छात्रावासों के कमरों के पंखों से लटक कर जान दी जबकि एक ने फैकल्टी बिल्डिंग की छत से कूद कर तथा दूसरे ने ट्रेन के सामने कूद कर जान दी जबकि एक छात्र ने कोई जहरीला पदार्थ खाकर जान दी। नौंवी आत्महत्या की घटना 23 अगस्त 2012 को हुई थी जिसमें छात्र ने पंखे से लटकर जान दी थी।

आरटीआई में बताया गया कि इन आठों आत्महत्याओं के मामलों की जांच के लिये संस्थान ने कभी भी जांच कमेटी का गठन नहीं किया बल्कि तथ्यान्वेषी समितियों का गठन किया। इन समितियों ने अपनी रिपोर्ट में क्या कहा इस बारे में संस्थान ने कुछ भी बताने से इंकार किया था।

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