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फाइल गायब, सीना चौड़ा!

एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी उस समय का किस्सा सुनाते हैं,ोब वह नौकरी में नए-नए आए थे। एक बड़े भ्रष्ट अधिकारी की फाइल उनके विभाग में थी। फाइल ऊपर से माँगी गई, लेकिन नहीं मिली। सारा विभाग फाइल ढूँढ़ने में लगा रहा। फाइल नहीं मिलनी थी सो नहीं मिली। तब नई फाइल बनाकर ऊपर भेाी गई, लेकिन नई फाइल से उनका कुछ बिगड़ने वाला नहीं था। परिणाम यह हुआ कि वह भ्रष्ट अधिकारी अपने पूर सेवाकाल में सीना तानकर नौकरी करता रहा। करीब एक दशक बाद एक दिन उस फाइल का रहस्य उाागर हुआ। पता चला कि उस फाइल को उनके ही विभाग के प्रमुख अफसर अपने घर ले गए थे। किसकी हिम्मत थी प्रमुख पर शक करने या पूछने की? एसा ही एक और किस्सा एक अन्य अफसर ने बताया। कहने लगे कि एक अधिकारी ने तो अपने खिलाफ सबूत वाली फाइलें हीोलवा दी थीं। यह सचिवालय से बाहर का मामला है। इसमें एक कर्मचारी निलंबित भी हुआ, लेकिन अफसर का बाल बाँका न हुआ।ड्ढr एक संयुक्त सचिव बताते हैं कि फाइलें गायब होने और दबाने का कार्य मंत्रियों के यहाँ भी खूब होता है, क्योंकि उनसे सवाल-ावाब कोई नहीं कर सकता। वह कहते हैं-अफसरों, कर्मचारियों की छोड़िए, कई पूर्व मंत्री व उनका स्टाफ एसे मामलों में सिद्धहस्त रहे हैं। अफसर, इांीनियर, ठेकेदार, डॉक्टर, अपराधी, माफिया आदि के मामलों में डीलिंग के बाद फाइलों का पता ही नहीं लगा कि कहाँ गईं। कुछ मामले समय बीतने के बाद सामने आते हैं। फाइलें दबाने या मामलों को लंबा खींचने के तो अनेक बहाने हैं।ड्ढr सचिवालय सेवा के एक पुराने विशेष सचिव ने भी दिलचस्प किस्सा सुनाया। कहने लगे-एक बदनाम विभाग के एकोिले में तैनात भ्रष्ट अफसर के खिलाफोाँच रिपोर्ट आई। अफसर को भनक लग गई। भ्रष्ट अफसर को भनक लगोाए किोाँच उसके खिलाफ है तो वह बचने का हर रास्ता खोने लगता है। एक पुराने विशेष सचिव ने बताया कि एसे ही भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए फाइल ऊपर भेाी गई और वहाँ से लौट आई तो पता चला कि उस फाइल सेोाँच रिपोर्ट के पन्ने ही गायब थे। एसे मामलों में कभी-कभी छोटे अधिकारी-कर्मचारी नप भीोाते हैं, लेकिन राानेताओं व अफसरों पर कौन कार्रवाई कर?ड्ढr फाइल सिस्टमड्ढr सिस्टम के अनुसार फाइल किसी विभाग में समीक्षा अधिकारी से चलकर अनुभाग अधिकारी फिर क्रमश: अनु सचिव, संयुक्त सचिव या उप सचिव, विशेष सचिव, सचिव, प्रमुख सचिव और फिर मंत्री के पास पहुँचती है। इसी चैनल से लौटती भी है। कुछ फाइलें इससे भी ऊपर यानी मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री कार्यालय तकोाती हैं। हरोगह फाइल रिसीविंग व डिस्पैच में चढ़ती हैं। शाम को फर्राश अनुभाग का ताला बंद करता है। सुबह वही खोलता है, लेकिन अनुभाग खुलने के बाद फाइलों की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। कैसे हो फाइलों की हिफाातड्ढr फाइलें गायब होने और दबाने से रोकने का सबसे कारगर उपाय ई-फाइल है। कम्प्यूटर पर पूरी फाइल रिकार्ड करने की मुहिम प्रदेश सरकार ने शुरू की है। कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह और मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता ने इस बार में सभी विभागों को निर्देशोारी कर दिए हैं।

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