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मुसीबत में शीला दीक्षित, दर्ज हो सकती है एफआईआर

मुसीबत में शीला दीक्षित, दर्ज हो सकती है एफआईआर

अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार बाहर से समर्थन दे रही कांग्रेस से लगातार टकराव के मूड में नजर आ रही है। सरकार ने 2010 में राजधानी में हुए राष्ट्रमंडल खेलों से संबंधित एक मामले में भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एसीबी) को नई प्राथमिकी दर्ज कर पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है।

यह मामला राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान खरीदी गई स्ट्रीट लाइट से जुड़ा है। ब्यूरो इस मामले में कथित अनियमितताओं की जांच करेगा। इस खरीद में 92 करोड़ रुपए का सरकारी खजाने का नुकसान हुआ था। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री के अलावा शीला सरकार में लोक निर्माण मंत्री रहे राजकुमार चौहान की दिक्कतें भी बढ़ सकती हैं। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को अनुमति दी थी।

गौरतलब है कि सोमवार को केजरीवाल ने 2008 के विधानसभा चुनाव से पहले अवैध कालोनियों को नियमित करने के मामले में भी जांच के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखा है। लोकायुक्त की रिपोर्ट के आधार पर सरकार दीक्षित के खिलाफ कार्रवाई का मन बना चुकी है। इस मामले में राजनीतिक लाभ के लिए कालोनियों को नियमित करने की बात है, जिसे चुनाव आचार संहिता का उल्लघंन माना गया है।

आप सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिससे पूर्व कांग्रेस सरकार के कई कांग्रेस नेता फंस सकते हैं। सरकार 1984 के सिख दंगों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने के लिए भी उपराज्यपाल नजीब जंग को लिख चुकी है। राष्ट्रमंडल खेलों की जांच के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुंगलू कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में दीक्षित की संलिप्पता का जिक्र किया था।

सरकार बनाने के बाद चुनाव में किए गए वादे के अनुसार दीक्षित पर कार्रवाई नहीं करने के लिए केजरीवाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के निशाने पर हैं। केजरीवाल ने दीक्षित पर कार्रवाई करने के लिए विधानसभा में विपक्ष के नेता हर्षवर्धन से सबूत मांगे थे, जिसे लेकर भाजपा ने मुख्यमंत्री की कड़ी आलोचना की थी।

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