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विदेशी वैज्ञानिक तलाशेंगे संक्रामक रोगों की वजह

विदेशी वैज्ञानिक तलाशेंगे संक्रामक रोगों की वजह

उत्तर बिहार खासतौर पर मुजफ्फरपुर लंबे समय से संक्रामक रोगों से परेशान रहा है। यहां की जलवायु, मौसम, रहन-सहन के साथ रोगों के फैलने के कारणों का पता लगाने के लिए बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी मेडिकल साइंस के वैज्ञानिक शोध करेंगे। बीएचयू के वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे शोध में यूएसए के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआइएच) व बेल्जियम के टॉपिकल मेडिसिन रिसर्च सेंटर (टीएमआरसी) भी साथ रहेंगे।

पांच वर्षों तक चलने वाले इस शोध के लिए बेल्जियम के वैज्ञानिक डॉं. वार्ट ऑस्टिन के नेतृत्व में छह सदस्यीय दल बनारस से बुधवार को मुजफ्फरपुर पहुंचा। दल ने शोध के लिए कांटी प्रखंड के करीब 50 गांवों को गोद लिया है। बुधवार शाम दल के सदस्यों ने सिविल सर्जन डॉं. ज्ञानभूषण से मिलकर जिले में संक्रामक रोगों की वर्तमान हालत के बारे में विस्तृत जानकारी ली। वैज्ञानिक डॉं. ऑस्टिन ने सिविल सर्जन से उत्तर बिहार में संक्रामक रोगों के सर्वाधिक प्रकोप के कारणों को भी जाना। इस दौरान मुजफ्फरपुर से कालाजार के उन्मूलन में आ रही मुख्य परेशानी के बारे में भी पूछताछ की गई। सीएस ने भी बेतिया में बतौर जिला मलेरिया पदाधिकारी रहने के दौरान अपने अनुभवों की चर्चा की। दल ने जिले में कालाजार व फायलेरिया के मरीजों की बढ़ रही संख्या के कारणों के बारे में भी जाना। शोध दल में डॉं. पारितोष मालवीय, डॉं. अनिल शर्मा, डॉं. वीरेंद्र पाठक, डॉं. शांति व डॉं. बीके दुबे शामिल हैं।

शोध में इन कारणों का लगाएंगे पता
उत्तर बिहार में संक्रामक रोगों का सबसे अधिक प्रकोप क्यों
कालाजार के लगातार जारी रहने की क्या है वजह
इंसेफालाइटिस के लगातार बढ़ने असर का कारण
फाइलेरिया-कालाजार के बीच आपसी संबंध
प्रभावित इलाकों के लोगों का कैसा है रहन-सहन

वर्जन
उत्तर बिहार में संक्रामक रोगों के प्रकोप का पता शोध के जरिए लगाया जाएगा। पांच वर्षों तक हम संबंधित गांवों में पूरी सक्रियता से काम करेंगे। साथ ही कालाजार के साथ-साथ फायलेरिया के कारणों को भी शोध में शामिल किया गया है।
-डॉं. वार्ट ऑस्टिन, वैज्ञानिक

सबका होगा हेल्थ सर्वे
इस दल की गाइड लाइन के आधार पर रामबाग कालाजार सेंटर के कर्मी संबंधित गांवों के एक-एक परिवार का हेल्थ सर्वे कर रहे हैं। पांच सालों तक इनके स्वास्थ्य की  नियमित जांच व अध्ययन किया जाएगा। जन्म से लेकर 5 साल तक बच्चे का पूरा हेल्थ रिकार्ड रखा जायेगा।
-डॉं. ज्ञानभूषण, सीएस

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