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फूलों की दुनिया का नाम है... मुगल गार्डन

फूलों की दुनिया का नाम है... मुगल गार्डन

राष्ट्रपति भवन में स्थित मुगल गार्डन दुनिया के खूबसूरत फूलों के बागों में से एक है। यहां पर रंग-बिरंगे और एक से बढ़कर एक बेहतरीन फूलों को देख सकते हो, उनकी खुशबुओं को महसूस कर सकते हो और घंटों तितलियों की तरह इन फूलों के आसपास मंडरा सकते हो। हर साल यह बाग फरवरी-मार्च में आम लोगों के लिए खोला जाता है। तो देर किस बात की, चलो इसकी सैर पर चलते हैं प्रसन्न प्रांजल के साथ...

फूलों का यह विशाल बाग मुगल गार्डन राष्ट्रपति भवन के पीछे के भाग में बना हुआ है। यह ऐसा गार्डन है, जहां देश-विदेश के सभी तरह के रंग-बिरंगे मनमोहक सुगंधित फूलों और फलों के पेड़ हैं, जिनका आनंद तुम ले सकते हो और अपनी जानकारी को बढ़ा सकते हो। यहां कई छोटे-बड़े बगीचे हैं, जैसे पर्ल गार्डन, बटरफ्लाई गार्डन, सर्कुलर गार्डन, हर्बल गार्डन आदि। 

फूलों की बेहतरीन किस्में
यहां कई तरह के दुर्लभ फूल हैं, अति दुर्लभ काला गुलाब और हरे गुलाबों को देख सकते हो तुम। गुलाब की ही 250 से भी अधिक किस्में हैं इस बाग में। इसके अलावा यहां 125 प्रकार के गुलदाउदी, 50 से अधिक किस्म के बोगनविलिया और दुनियाभर में पाए जाने वाले सभी तरह के मैरीगोल्ड (गेंदा) को देख सकते हो। कैलेन्डुला एन्टिरहिनम, एलिसम, डिमोरफोथेका, केलिफोर्निया पॉपी, लाक्र्सपर, गेरबेरा, गोडेतिया, लिनेरिया, पैन्सी, स्टॉक तथा डहेलिया, कारनेशन, स्वीटपी जैसे सर्दियों में खिलने वाले फूल काफी संख्या में यहां हैं। इनके अलावा मॉलश्री, पुत्रंजीव, सरू, जुनिपर, चाइना औरेंज जैसे वृक्षों को भी यहां देखा जा सकता है। 

अर्जुन, भीम और जंतर-मंतर का फूल...
मुगल गार्डन में कुछ गुलाब के फूलों के नाम काफी रोचक हैं। कुछ फूलों के नाम महान हस्तियों के नामों पर हैं, जैसे मदर टेरेसा, अर्जुन, भीम, राजा राम मोहन, जवाहर, डॉं. बी.पी. पाल आदि, तो कुछ विदेशी नामचीन हस्तियों के नामों पर जैसे जॉन एफ कैनेडी, क्वीन एलिजाबेथ, लिंकन, मोंतेजुमा आदि। कुछ तो और रोचक हैं, जैसे हैप्पीनेस, सेंचुरी टू, फर्स्ट प्राइज, जंतर-मंतर, अमेरिकन हेरिटेज, आइसबर्ग, ग्रांडा, कमांड परफॉर्मेंस, इम्प्रेटर आदि।

बगीचे की बनावट ऐसी है...
मुगल गार्डन को राष्ट्रपति भवन के पीछे इसलिए बनाया गया था, क्योंकि मुगलों के बाग-बगीचे महल के पीछे ही हुआ करते थे। इसलिए एडवर्ड लुटियन्स ने इसे वैसा ही स्थान और स्वरूप दिया, जिस तरह से मुगल दिया करते थे। 13 एकड़ में फैले इस गार्डन में मुगल शैली के साथ-साथ ब्रिटिश शैली की भी झलक दिखती है। मेन गार्डन मुगल गार्डन का सबसे बड़ा भाग है। इसे पीस द रजिस्टेन्स के नाम से जाना जाता है। यह 200 मी. लंबा और 175 मी. चौड़ा है। इसके उत्तर और दक्षिण में टेरेस गार्डन हैं और इसके पश्चिम में एक टेनिस कोर्ट तथा लॉन्ग गार्डन है। यहां से दो नहरें उत्तर से दक्षिण की ओर और दो नहरें पूर्व से पश्चिम की तरफ बहती हैं, जिनके बीच कमल के फूल के आकार के 6 फव्वारे बने हुए हैं। इन कमल के फव्वारों से 12 फीट की ऊंचाई तक पानी की धार उठती है।

चतुर्भुज आकार है इसका
यह गार्डन राष्ट्रपति भवन के मुख्य भवन से सटा है। इसे चार भागों में बांटा गया है। गार्डन के बीच में राष्ट्रपति द्वारा स्वागत समारोहों और प्रीति भोजों का आयोजन किया जाता है। इसकी बनावट मुगलों की चार बाग शैली का एहसास कराती है। 

लॉन्ग गार्डन या गुलाबों के गलियारे
लॉन्ग गार्डन से होकर ही सर्कुलर गार्डन के लिए रास्ता जाता है। इस गार्डन में गुलाबों के लम्बे-लम्बे गलियारे हैं, जिनमें तराशी गई छोटी-छोटी छतरीनुमा झाडियां हैं, जो देखने में ऐसी प्रतीत होती हैं जैसे एक खूबसूरत रंगीन विशाल गलीचा बिछा हो।

पर्दा गार्डन
पर्दा गार्डन ऊंची-ऊंची दीवारों से घिरे मेन गार्डन के पश्चिम में है। इसमें छोटी-छोटी तराशी गई झाडियों से घिरे गुलाबों के स्क्वायर हैं, जो काफी खूबसूरत दिखते हैं। गार्डन के किनारे-किनारे चाइना ऑरेंज के पेड़ लगाए गए हैं। इस मौसम में पेड़ों पर फलों को देखना काफी मजेदार लगता है।

सर्कुलर या बटरफ्लाई गार्डन
सर्कुलर गार्डन पश्चिमी किनारे पर है। यहां पौधों की बहुत सी क्यारियां हैं। इसमें साल भर खिलते रहने वाले अनेक प्रजाति के फूल हैं। इन फूलों पर काफी संख्या में तितलियां देखी जाती हैं। मुगल गार्डन में सबसे अधिक तितलियां इसी गार्डन में फूलों पर मंडराती हैं, इसी वजह से इसे बटरफ्लाई गार्डन के नाम से भी जाना जाता है। गार्डन के बीच में बने म्यूजिकल फाउंटेन से शहनाई और वन्दे मातरम की धुन निकलती सुनाई देती है।

हर्बल गार्डन
मुगल गार्डन में हर्बल गार्डन है, जहां देश-विदेश के कई प्रमुख औषधियों के पेड़ हैं। यहां मौजूद सभी औषधियां काफी दुर्लभ और महत्वपूर्ण हैं। आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में इन औषधियों का खूब इस्तेमाल किया जाता है। यहां पर अश्वगंधा, विलायती पुदीना (बर्गामोट मिंट), ब्राह्मी, जावा घास, घृतकुमारी, गिलोय, ईसबगोल देख सकते हो।

ये फूल जरूर देखना...
गुलाब, गुलदाउदी, गेंदा (मैरीगोल्ड), डहेलिया, रात की रानी, मोगरा, मोतिया, जूही, बिगेनिया वनिस्ता, गार्डेनिया, पोट्रिया, हरसिंगार, बोगनविलिया।

कब जाओगे सैर पर...
मुगल गार्डन प्रतिवर्ष वसंत ऋतु में एक महीने के लिए खुलता है। सामान्यत: 15 फरवरी से 15 मार्च तक खुलने वाले इस गार्डन में वैसे तो पूरे महीने तुम जा सकते हो, लेकिन शुरुआत के 10-15 दिनों में यहां की छटा काफी खूबसूरत होती है। मंगलवार से रविवार तक सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक यह खुला रहता है, लेकिन प्रवेश शाम 4 बजे तक ही है। सोमवार को गार्डन बंद रहता है। इसमें आने-जाने का रास्ता राष्ट्रपति भवन के गेट नम्बर-35 से है। गेट नम्बर—35 चर्च रोड के पश्चिम सिरे पर नॉर्थ एवेन्यू के पास है। इसे देखने के लिए प्रवेश शुल्क नहीं है, नि:शुल्क इसका आनंद उठा सकते हो।

इनका रखना ध्यान
गार्डन के अन्दर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर रोक है। यहां पर खाने के सामान, बैग, मोबाइल, कैमरा आदि ले जाने की मनाही है। अगर तुम्हारे पास कोई सामान है तो उसे गेट नम्बर-35 के पास बने लॉकर रूम में रखवा सकते हो।

कैसे बना मुगल गार्डन
आज से 103 साल पहले 1911 में जब अंग्रेजों ने अपनी राजधानी कलकत्ता से दिल्ली शिफ्ट की, तब वायसराय के रहने के लिए प्रसिद्ध अंग्रेज आर्किटेक्ट एडवर्ड लुटियन्स ने रायसीना की पहाड़ी को काटकर वायसराय हाउस (राष्ट्रपति भवन का पुराना नाम) बनाया। उसमें फूलों का बाग बनवाया गया, लेकिन वायसराय लॉर्ड हार्डिग की पत्नी लेडी हार्डिंग को वह पसंद नहीं आया। उन्होंने मुगल शैली में गार्डन की बात कही, तब लुटियन्स ने मुगल शैली में गार्डन बनाया। 1928 में यह बनकर तैयार हुआ और इसमें वायसराय और उनकी पत्नी ने कदम रखा। तभी से इसका नाम मुगल गार्डन पड़ गया। देश आजाद होने और गणतंत्र बनने के बाद वायसराय हाउस राष्ट्रपति हाउस बन गया। देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉं. राजेन्द्र प्रसाद ने इसे जन साधारण के लिए खुलवाया। तब से हर साल यह एक माह के लिए आम लोगों के लिए खोला जाता है।

भारतीय राज्यों से मिले...
हेलिकोनिया:
केरल, हैदराबाद, चेन्नई
बोगनविलिया: खजुराहो (मध्य प्रदेश)
अल्पीनिया: गोवा
पेल्टोफोरम: चेन्नई
लीची: देहरादून
कन्ना, वाटर लिली: मुंबई
एसोर्टेड जैसमीन: चेन्नई, हुबली

विदेशों द्वारा दिए गए फूल-पेड़
टय़ूलिप्स: नीदरलैंड
बर्ड ऑफ पैराडाइज: मॉरिशस
ऑलिव: फ्रांस
ऑर्किड्स: ब्राजील
चेरी ब्लॉसम: जापान
वाटरलिली: चीन
कोनार्ड एडेन्योर: जर्मनी
एसोर्टड सिजनल्स: जापान

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