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महँगाई से लड़ना ही एक रास्ता है

महँगाई कीर्तिमान गढ़ रही है। अनाा, दाल, सबी से लेकर बैंकों के र्का का ब्याा दर बढ़ रहा है और इसकी चपेट में निम्न मध्यम और मध्यम वर्ग पिस रहा है। ऐसे में आय और व्यय का बेहतर प्रबंधन ही महँगाई से लड़ने का उपाय है। विशेषज्ञों की राय है कि बैंक के र्कादार एफडी तुड़वाकर र्का अदा करने को प्राथमिकता दें, इससे उन पर आर्थिक बोझ कुछ कम होगा।ड्ढr चाटर्ड एकाउंटेन्ट असीम श्रीवास्तव कहते हैं कि वित्त प्रबंधन केोरिए महँगाई से कुछ हद तक लड़ाोा सकता है, बशर्ते सही प्लानिंग कीोाए। वह कहते हैं कि फ्लोटिंग ब्याा दर पर होम लोन लेने वालों पर खासी मार पड़ रही है। ऐसे र्कादार एफडी या बाण्ड तुड़ाकर र्का अदा करें तो उन पर ब्याा का भार कम होगा। वित्त प्रबंधक सांीव वर्मा कहते हैं कि बचत न करने से भी लोग पस्त हो रहे हैं। पसर्नल लोन के कारण बैंकों की पूँाी घट रही थी। इसलिए उन्होंने र्का पर ब्याा दरें बढ़ा दी। राष्ट्रीकृत बैकों ने र्का पर ब्याा दर साढ़े आठ फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी तक और निाी बैंकों की ब्याा की दर 12 फीसदी तक पहुँच गई है। अलग-अलग बैंकों की ब्याा दर में मामूली अंतर है। ऐसे में र्का की ईएमआई बढ़ी है। ऐसे में लोगों को र्का से तौबा करना और दूसर निवेशों को खत्म कर बैंक का र्का चुकाने को प्राथमिकता देनी चाहिए। वहीं, शेयर ब्रोकर दिनेश कुमार का कहना है कि टॉप कम्पनियों केोून में खत्म होने वाली तिमाही का परिणाम देखने के बाद ही शेयरों में निवेश उचित होगा।ड्ढr क्या करं : अगर बैंक के सेविंग एकाउंट में धनराशि है, तो उसका बड़ा हिस्सा एफडी में डाल दें। आवश्यकता पड़ने पर उसी बैंक से एक फीसदी अधिक दर परोरूरत की धनराशि लोन ले लें। इससे एफडी की राशि पर सवा नौ फीसदी से पौने दस फीसदी तक का ब्याा मिलेगा और आपको र्का की राशि पर सिर्फ एक फीसदी अधिक ब्याा देना होगा।ड्ढr सोने का ोवर न खरीदें : पेा 14

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