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कठिन संघर्ष के बाद सोनाली को मिली नौकरी

कसमार। शेखर शरदेंदू। तेजाब पीड़िता सोनाली मुखर्जी को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 04 फरवरी को सरकारी नौकरी का प्रमाण-पत्र दिया। लेकिन चेहरे पर तेजाब डालनेवाले तीनों युवकों को कठोर दंड नहीं मिल सका है। इसके लिए सोनाली ने 10 वर्षो में काफी संघर्ष किया। मालूम हो कि कसमार प्रखंड मुख्यालय से सटे धधकिया गांव निवासी चंडीदास मुखर्जी की पुत्री सोनाली मुखर्जी 10 वर्ष पहले धनबाद के भेलाटांड़ में रहती थी। उसने कुछ शरारती युवकों द्वारा किए जा रहे छेड़छाड़ का विरोध किया था।

युवकों ने सोनाली के चेहरे पर तेजाब डाल दिया था। तेजाब डाले जाने के बाद 9 वर्ष तक उसके पिता धनबाद, बोकारो से लेकर देश के कई अस्पतालों में उसका इलाज कराया। इलाज के लिए पिता ने अपने पैतृक गांव धधकिया में जमीन तक बेच दी।

अचानक वर्ष 2012 में सोनाली ने इच्छामृत्यु की मांग की थी। इसके बाद सोनाली की सहानुभूति व सहायता में सिरे्फ झारखंड ही नहीं बिल्क पूरा देश उसके साथ खड़ा हो गया। देश के कई संस्थाओं ने उसके इलाज का खर्चा उठाने काजिंम्मा लिया तो स्कूलों से लेकर सड़कों तक लोग सोनाली की सहायता में कूद पड़े।

सोनाली कौन बनेगा करोड़पित कार्यक्रम में लारा दत्ता के साथ सदी के महानायक अमिताभ बच्चान के साथ नजर आई। सोनाली की कई चरणों में इसके चेहरे की सर्जरी की गई तथा अभी भी कई बार सर्जरी होना बाकी है।

सोनाली मुखर्जी के संघषों को देखते हुए झारखंड सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने उसे सरकारी नौकरी देने की घोषणा की थी, जिंसे हेमन्त सोरेन की सरकार ने पूरा किया। चेहरे पर तेजाब फेंकनेवाले युवकों को कठोर दंड दिलाने के लिए सोनाली का संघर्ष जारी है।

सोनाली के पिता चंडीदास मुखर्जी ने बताया कि चेहरे की सर्जरी पूरी होने के बाद विदेश में सोनाली के नेत्र प्रत्यारोपण की भी बात चल रही है। इसके लिए देश-विदेश के कई संस्थाओं व प्रमुख लोगों ने भरोसा दिया है। सोनाली के संघषों को आगे बढ़ाने में बोकारो की संजीवनी संस्था एवं बेरमो की गॉड इज वन नामक संस्था ने भी काफी साथ दिया।

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