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मैं आज भी आपकी ही तरह एक विद्यार्थी हूँ:चौरसिया

पटना। अंतर्राष्ट्रीय बाँसुरीवादक पद्मविभूषण पण्डित हरी प्रसाद चौरसिया ने अपने पटना प्रवास के दौरान आरकेड बिजनेस कॉलेज के छात्रों के प्रश्नों का बेबाकी से जवाब दिया। अपने कार्यRम के दौरान वे बीच बीच में छात्रों से बात करते और राग, संगीत और जीवन में सफलता के बारे में कभी सवाल पूछते तो कभी कोई जानकारी देते।

प्रस्तुत है छात्रों के प्रश्न और उनके जवाब :1. गुरूजी, इसने सरे भिन्न भिन्न किस्म के वाद्य हैं, आपने बांसुरी को ही क्यों चुना ?जवाब : क्योंकि बाँसुरी सस्ती होती है (इसके साथ ही वे हंस देते हैं और हॉल में ठहाका गूंज जाता है), इसके अतिरिक्त एक कारण और भी है।

इनको (अपने संगत तबलावादक और बाँसुरीवादक की और इशारा करते हुए) अपने वाद्य को ठोक कर हमेशा टय़ून करना पड़ता है, लेकिन मेरी बाँसुरी ऐसी है कि इसे टय़ून करने की भी जरुरत नहीं पड़ती।

2. पढ़ाई के साथ संगीत में भी रूचि है, परन्तु समय की कमी है। तालमेल कैसे बैठाऊं ?जवाब : मैं जब छात्र था तो जहाँ मुझे अपने विषय में 35 नंबर आते थे, मैं बोलता था बस.ङ्घ अब अपना काम हो गया (फिर ठहाका गूंजता है), क्योंकि मैं उसके बाद अपनी सारी ऊर्जा संगीत में लगता था।

इसलिए, अगर आपमें जुनून है संगीत के लिए, तो आपको दोनों काम के लिए समय मिल जायेगा। मेरे पिता पहलवान थे और मुझे भी पहलवान ही बनाना चाहते थे, मेरे घर का माहौल भी संगीत का नहीं था। लेकिन, मुझे पागलपन था संगीत का।

इसलिए मैंने 14 साल की उम्र से ही अपना सारा जीवन संगीत को समर्पित कर दिया। किसी कार्यक्रम में पंडित भोलानाथ जी का बांसुरीवादन सुना, तो बांसुरी का जादू मेरे मन-मष्तिष्क में छा गया। उसके बाद उस्ताद अलाउद्दीन खान साहब की सुपुत्री अनपूर्णा देवी जी से विधवित शिक्षा ली।

फिर तो जीवन की दिशा ही बदल गयी। 3. गुरूजी, जीवन में बहुत निराशा और आपाधापी है। हर तरफ नकारात्मक माहौल है। कैसे बचा जाये इससे ? जवाब : नकारात्मकताओं से निराश नहीं होना है। आज यह पूरा हॉल भरा हुआ है, पर जब मैंने बजाना शुरू किया था, तब मुश्किल से 10-15 लोग सुनने आते थे और उनमें भी कई तो उंघते उंघते सो जाते थे (फिर हॉल में हँसने की आवाज़ गूंजती है), लेकिन मैंने ऐसा कभी नहीं सोंचा कि इतने कम लोग क्यों आये हैं।

इसलिए, अपने उद्देश्य पर ईमानदारी से कायम रहिये, मंजिल मिलकर रहेगी। याद रखिये, आपकी मर्जी के बगैर कोई आपमें नकारात्मकता नहीं भर सकता। इसलिए आप किसी को यह अधिकार मत दीजिये कि वह आपकी सोंच में यह सब डाल सके। 4 . आपके गुरु कौन हैं ?जवाब : हर वह व्यक्ति, जिससे मैं कुछ भी सीखता हूँ, वह मेरा गुरु है। मैं भी आपकी ही तरह आज भी एक विद्यार्थी हूँ और हर दिन कुछ नया सीखता हूँ। ज्ञान एक सागर है, जो कभी खम्त्म ही नहीं होता।

हर दिन कि अभी तो कुछ भी नहीं सिखा, बहुत कुछ सिखना बाकि है। 5. आपने चाँदनी, सिलसिला, डर, लम्हे जैसी सुपर हिट फिल्मों का संगीत दिया, जो हरेक के जुबान पर आज भी कायम है। आज के गीत जितनी जल्दी आते हैं, उतनी ही जल्दी चले भी जाते हैं। इस फासले को आप कैसे देखते हैं ?जवाब : संगीत तो संगीत ही है। पर, आज सब कुछ बहुत फमस्ट हो गया है। हमारे समय में काफी समय लगता था एक धुन को बनाने में।

कई बार उसे सुना जाता था, फिर कुछ बदलाव किया जाता था। अब समय की कमी है। फिर भी, संगीत तो आखिर संगीत ही है, कानों को अच्छा लगेगा ही। 6. आपको इस उम्र में इतनी ऊर्जा कहाँ से मिलती है ?जवाब : हर व्यक्ति को अपने काम से प्यार करना चाहिए, यदि वह ऐसा करेगा तो उसे अपने काम से ही ऊर्जा मिलने लगेगी। मेरे लिए बाँसुरीवादन साधना है, जो मुझे निरंतर ऊर्जा और आत्मदृष्टि की प्राप्ति होती रहती है।

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