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आलू प्रसंस्करण के क्षेत्र में भयमुक्त निवेश करें: मंत्री

सरकार ने निवेशकों के लिए माहौल तैयार कर दिया है। विधि व्यवस्था को लेकर अब कोई समस्या नहीं रही, बिजली की स्थिति सुधरी है, सड़क की समस्या भी नहीं रहेगी और सबसे बड़ी बात है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं वाजिब समस्याओं के निराकरण को हर वक्त तैयार बैठे हैं। खाद्य प्रसंस्करण का क्षेत्र खाली पड़ा है। इस अवसर का लाभ उठाने के लिए आलू प्रसंस्करण के क्षेत्र में भयमुक्त हो निवेश करें। फिर देखिये किसानों की मेहनत कैसे रंग दिखाती है। कृषि मंत्री नागमणि ने कुछ इसी अंदाज में शनिवार को उद्योगपतियों का आह्वान किया। वे आलू और आलू प्रसंस्करण के क्षेत्र में निवेश के अवसर पर आयोजित कांन्फ्रेंस का उद्घाटन करने के बाद उद्योगपतियों को संबोधित कर रहे थे। समारोह का आयोजन राज्य के कृषि विभाग द्वारा इंडियन चैंबर ऑफ कामर्स तथा केन्द्रीय फूड प्रांसेसिंग उद्योग मंत्रालय के सहयोग से किया गया था।ड्ढr ड्ढr कृषि मंत्री ने कहा कि नौकरी और व्यवसाय दोनों के लिए कृषि क्षेत्र के अलावा दूसरा कोई सेक्टर नहीं बचा। उद्योगों के अभाव में यहां आलू का प्रसंस्करण नहंी हो पाता जबकि बिहार देश का तीसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य है। यहां की उत्पादित किस्में प्रसंस्करण के लिए जरूरी हर शर्तें पूरी करती हैं। इसके अलावा राज्य में शीत गृहों की संख्या भी जरूरत से आधी है। ऐसे में इस क्षेत्र में निवेश कभी घाटे का सौदा नहीं हो सकता। औद्योगिक विकास सचिव एके सिन्हा ने कहा कि राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार वर्ष 2006 में ही औद्योगिक प्रोत्साहन नीति बना चुकी है। इसके तहत भूमि का निबंधन मुफ्त में होता है। दस वर्षों तक उनके उत्पाद पर लगने वाले वैट की 80 प्रतिशत राशि वापस कर दी जाती है। समारोह को कृषि सचिव सीके अनिल, इंडियन चैंबर ऑफ कामर्स कोलकाता के एमके जालान के अलावा आर पी राय, आदि ने भी संबोधित किया। धन्यवाद ज्ञापन कृषि निदेशक बी राजेन्दर ने किया।

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