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लोकपाल चयन समिति को लेकर बढ़ा टकराव

नईदिल्ली। विशेष संवाददाता।  लोकपाल की चयन समिति में प्रख्यात न्यायविद के तौर पर पी पी राव की नियुक्ति के खिलाफ भाजपा ने राष्ट्रपति का दरवाजा खटखटाया है। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कर कहा है कि वह चयन समिति में आम राय से नियुक्ति करने की उसकी मांग पर विचार करें।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने इस हालात का ठीकरा प्रधानमंत्री पर फोड़ते हुए कहा कि उन्होंने आम राय से हटकर लोकपाल की संस्था को अस्तित्व में आने से पहले की बड़ा नुकसान पहुंचाया है। सोमवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में लोकपाल की चयन समिति के लिए पांचवे सदस्य को चुनने के लिए हुई बैठक में 3-1 के बहुमत से पी पी राव का नाम राष्ट्रपति को भेजा गया है। बैठक में लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने राव के कांग्रेस के समर्थक होने को लेकर इसका विरोध किया था और बुधवार को उन्होंने राष्ट्रपति के सामने अपनी बात खुलकर रखी।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली भी इस विवाद में खुल कर सामने आ गए हैं। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह का प्रधानमंत्री पद का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और उन्हें आत्ममंथन करना चाहिए कि उन्होंने अपने कार्यकाल में सार्वजनिक पदों पर होने वाली नियुक्ति में कोलेजियम प्रणाली को कितना नुकसान पहुंचाया है। लोकपाल की संस्था को तो अस्तित्व में आने के पहले ही वे उसे राजनीति में घसीट कर ले गए। जेटली ने कहा कि सीवीसी मामले में पी जे थामस की नियुक्ति पर भी प्रधानमंत्री ने ऐसी ही जिद की थी और बाद में उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद हटाना पड़ा था।

अब वे वही जिद लोकपाल चयन समिति के सदस्य की नियुक्ति में कर रहे है। जेटली ने कांग्रेस को याद दिलाया कि राजग सरकार के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति में भी तब के कांग्रेस के दोनों विपक्ष के नेताओं ने राजनीतिक कारणों से ही जस्टिस जे एस वर्मा की नियुक्ति का विरोध किया था। जबकि उस समय उनसे बेहतर कोई व्यक्ति नहीं था। -----------------समाप्त।

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