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हाईकोर्ट ने मंत्री आजम खां को नोटिस दी

लखनऊ विधि संवाददाता। उप्र. जल निगम के चेयरमैन पद पर मंत्री आजम खां की नियुक्ति को चुनौती देने और उन्हें पद के आयोग्य करार देने के सिलसिले में दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मंत्री को नोटिस जारी करते हुए सरकार तथा जल निगम से जवाब मांगा। पीठ ने सभी को चार सप्ताह में प्रतशिपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया।

तत्पश्चात याचिकाकर्ता को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय देते हुए याचिका पर अगली सुनवायी पांच सप्ताह बाद तय की है। न्यायमूर्ति इम्तियाज मुर्तजा तथा न्यायमूर्ति डीके उपाध्याय की खण्डपीठ ने उक्त आदेश जल निगम के अवकाश प्राप्त सुपरीटेंडिंग इंजीनियर रामसेवक शुक्ला की ओर से दायर याचिका पर प्रारम्भिक सुनवायी करते हुए दिया है। याचिका पर वकील हरशिंकर जैन ने जल निगम के चेयरमैन पद नियुक्ति के सम्बंध में वर्ष 1971 और 2006 के प्रावधानों का हवाला देते हुए दलील दी थी कि सरकार के मंत्री के रूप में कार्य करते हुए आजम खां को उप्र. जल निगम के चेयरमैन पद नियुक्त नहीं किया जा सकता है।

उनकी दलील थी कि चेयरमैन का पद लाभ का पद है। इस कारण खां को चेयरमैन पद से हटाने का आदेश दिया जाए और इस पद पर उनकी तैनाती का आदेश रद्द किया जाए। याचिका पर सुनवायी के समय सरकार और जल निगम की ओर से प्रारम्भिक आपत्ति उठाते हुए दलील दी गई कि जल निगम से अवकाश प्राप्त इंजीनियर द्वारा प्रस्तुत याचिका पोषणीय नहीं है और श्री आजम खां की चेयरमैन पद पर तैनाती कानून के तहत सुरक्षित है।

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