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आराधना से होती है साधन की प्राप्ति

 रुद्रपुर। हिन्दुस्तान संवाद।  कथावाचक राघव ऋषि ने प्रवचन में कहा कि मानव जीवन में आराधना का भी एक उत्कृष्ट स्थान है। बिनाआराधना के आराध्य की कृपा हो पाना संभव नहीं है। आराधना आराध्य को रिझाने मनाने के लिए आवश्यक है। साथ आराधना ही हमारे जीवन में आवश्यक साधन की प्राप्ति के मार्ग को सुगम करा देती है। कथा वाचक श्री ऋषि ने कहा कि जीवन में जिसे आराधना का रस पीने को मिल रहा है, उसी के ऊपर प्रभु की कृपा हो रही है।

यह जान लेना चाहिए कि हमें जब अपने अवगुण स्पष्ट दिखाई देते रहे व हर पल उन दोषों का स्मरण बना रहे तो यह उसके दोषों को नष्ट करने का अवसर उस आराध्य से मिली है। कथा व्यास ने कहा कि जिस जीव को परमात्मा की सान्निध्य अवश्यक है, उसे उसके सत्कर्म ही उसे उसकी प्राप्ति करा देती है। जिस प्रकार सीता जी के अन्तर्मन में प्रभु श्रीराम को पति के रूप में पाने की इच्छा थी, वह उनके सत्य, स्नेह के कारण धनुष भंग के पश्चात यह शुभ अवसर मिल ही गया।

बड़े ही उत्साह के साथ राजा दशरथ ने श्रीराम का वविाह सीता के साथ कराया।

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