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छोटी-छोटी खुशियां

आपकी खुशी का राज क्या है? किसी खुश व्यक्ति से पूछकर देखें। अगर वह सचमुच खुश होगा, तो इसके सिवा उसके पास दूसरा जवाब नहीं हो सकता कि वह छोटी-छोटी बातों में खुशियां खोजने में उस्ताद है। अभिनेत्री और रंगमंच कलाकार जोहरा सहगल 102 साल की होने वाली हैं। लंबी उम्र का राज बताती हैं, मेरे चेहरे पर देखिए, आपको खुशी दिखेगी। बस कारण मत पूछिएगा, क्योंकि इसका जवाब मेरे पास नहीं होगा।

खुश रहना दुनिया का सबसे बड़ा वरदान है। जो खुश नहीं रह पाते, वे ही सही मायनों में अभागे हैं। अच्छी बात यह है कि खुश रहना हमारे हाथ में है। बस हम अपने नजरिये में थोड़ा बदलाव कर खुशी पा सकते हैं। अ न्यू अर्थ जैसी पुस्तक के लेखक एक्हर्ट टल्ल कहते हैं कि जिनको अमूमन बड़ी खुशी समझा जाता है, जैसे, नई कार खरीदना, अच्छी नौकरी हासिल होना, अच्छा इन्क्रीमेंट पाना, एक तो वे कम होते हैं और दूसरा, उन्हें महत्व देकर आप खुद को हासिल नहीं कर सकते। यह तो उन छोटी-छोटी खुशियों से ही संभव है, जो आपके जीवन में रोजाना और भारी मात्रा में आती हैं। यह और बात है कि आप उन्हें महत्व नहीं दे पाते। साहित्य का नोबेल पुरस्कार जीत चुकी नॉर्वे की साहित्यकार सिग्रिड अनसेड कहती थीं कि उन्हें नोबेल पाने से ज्यादा खुशी अपने छोटे-से बच्चे की उंगलियां थामने में होती है। अगर हम उनकी तरह नहीं सोच पाते, तो इसमें दोष किसका है? आखिर हमें छोटी-छोटी खुशियों का इंद्रधनुष क्यों नहीं दिखता? प्रकृति विज्ञानी कार्ल लिनोस ने कहा था कि आप जैसे ही प्रकृति या धार्मिकता के लिहाज से ईश्वर का राज अपने भीतर महसूस करते हैं, बाहरी सभी चीजों से एक एकात्मकता-सी महसूस होती है। वह एकात्मकता आपको अधिक संवेदनशील बनाती है। आइए, ऐसी संवेदनशीलता हासिल करें, जो छोटी-छोटी खुशियों को सहजता से खोज निकाले।

 

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  • Web Title:छोटी-छोटी खुशियां