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सत्या पर भरोसा

सत्या नडेला का माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ बनने की खबर दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी है, क्योंकि पिछले पांच महीने से माइक्रोसॉफ्ट के नए सीईओ की खोज की प्रक्रिया जारी थी, जिस पर पूरी दुनिया की नजर थी। माइक्रोसॉफ्ट किसी वक्त दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी थी और अब हालांकि वह अपने नए प्रतिद्वंद्वियों से पिछड़ गई है, लेकिन आज भी वह दुनिया की चौथी सबसे बड़ी कंपनी है। सत्या नडेला, बिल गेट्स और स्टीव बॉमर के बाद माइक्रोसॉफ्ट के तीसरे सीईओ हैं और उनके सीईओ बनने पर भारत में विशेष उत्साह होना स्वाभाविक है। सत्या नडेला हैदराबाद में पैदा हुए हैं और उनकी पढ़ाई-लिखाई भारत में ही हुई है। वे अब उन भारतीयों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं, जो बड़े बहुराष्ट्रीय उद्यमों के शीर्ष पर पहुंचे हैं। हैदराबाद में माइक्रोसॉफ्ट का एक महत्वपूर्ण शोध केंद्र है और यह उम्मीद है कि नडेला के सीईओ बनने के बाद यह केंद्र ज्यादा प्रमुखता प्राप्त कर लेगा। भारत माइक्रोसॉफ्ट के लिए एक प्रमुख बाजार है, जहां उसका व्यापार असाधारण तेजी से फैल रहा है।

नडेला एक ऐसे वक्त में सीईओ बने हैं, जब माइक्रोसॉफ्ट की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है। एक वक्त में विंडोज और माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस जैसे उत्पादों के सहारे सॉफ्टवेयर की दुनिया में लगभग एकाधिकार रखने वाले माइक्रोसॉफ्ट को सूचना प्रौद्योगिकी के नए दौर के मुकाबले में गूगल और एप्पल जैसे प्रतिस्पर्धियों से पिछड़ना पड़ा है। माइक्रोसॉफ्ट की रणनीति पर्सनल कंप्यूटिंग में अपना एकाधिकार बनाए रखने की थी, लेकिन इस बीच टेक्नोलॉजी ने नए क्षेत्र खोल दिए, जहां माइक्रोसॉफ्ट पहुंच नहीं पाया। वेब और मोबाइल कंप्यूटिंग के क्षेत्र में माइक्रोसॉफ्ट बहुत पीछे है, उसके प्रमुख उत्पाद पर्सनल कंप्यूटर (पीसी) और वाणिज्य के क्षेत्र में हैं। आज भी 80 प्रतिशत पीसी विंडोज पर चलते हैं, लेकिन मोबाइल में वह मुश्किल से चार प्रतिशत है। फिलहाल माइक्रोसॉफ्ट तेजी से विकसित होता हुआ क्षेत्र क्लाउड कंप्यूटिंग और व्यावसायिक उद्यम है, लेकिन हर हाथ में दिखाई देने वाले मोबाइल और टेबलेट में उसकी उपस्थिति नगण्य है। इस निजी इस्तेमाल के क्षेत्र में माइक्रोसॉफ्ट के लिए अपने को प्रासंगिक बनाना जरूरी है। सत्या नडेला के अपने अन्य प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले चुने जाने की एक बड़ी वजह यह भी है कि वे एक तकनीकी विशेषज्ञ हैं। बिल गेट्स ने यह पहले भी कहा था कि माइक्रोसॉफ्ट का मुखिया कोई तकनीकी व्यक्ति होना चाहिए। नडेला अब तक क्लाउड कंप्यूटिंग और इंटरप्राइज विभाग के प्रमुख थे, जो कंपनी का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ व्यापार है।

नडेला के अलावा जो भी लोग सीईओ की दौड़ में थे, लगभग वे सभी बाहरी थे और मूलत: प्रबंधन के लोग थे। माइक्रोसॉफ्ट की अपनी एक संस्कृति है, जिसमें बाहरी व्यक्ति बड़े पदों पर ज्यादा दिन टिक नहीं पाते। इस चुनौतीपूर्ण समय में शायद बिल गेट्स और उनके सहयोगी किसी बाहरी व्यक्ति पर भरोसा करने को तैयार नहीं थे, जो माइक्रोसॉफ्ट की कार्य संस्कृति न समझता हो। तकनीकी ज्ञान और कौशल पर आधारित उद्योगों का अपना एक तरीका विकसित हो जाता है, जिसके साथ ज्यादा छेड़खानी मुमकिन नहीं है। लेकिन नए जमाने की सूचना प्रौद्योगिकी के इस दौर में बढ़त बनाने के लिए माइक्रोसॉफ्ट को बहुत बदलना होगा। इस क्षेत्र में एक चुनौती यह होती है कि आपके पास ज्यादा वक्त नहीं होता, क्योंकि तकनीक तेजी से बदलती जाती है। माइक्रोसॉफ्ट को शायद बिल्कुल नए ढंग से सोचने की जरूरत है, देखना यह है कि क्या सत्या नडेला यह कर पाएंगे?

 

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