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बदसूरत दीवारें

दीवारों पर कुछ न कुछ लिखने की समस्या से दुनिया भर के शहर जूझते रहे हैं, कराची भी उनमें से एक है। दीवारों को पोतने की इस बुरी आदत ने न सिर्फ इस महानगर की खूबसूरती को दागदार बनाया है, बल्कि सिंध सूबे के तमाम शहरों और कस्बों की सरकारी व निजी इमारतों के अंजाम भी कुछ  ऐसे ही हैं। निस्संदेह, बहुत पुराने वक्त से दीवारों पर लिखा जाता रहा है और इसके नमूने दुनिया भर में मिले हैं, कई शहरों में तो कुछ खास जगहों पर इस काम की बाकायदा इजाजत दी गई, ताकि दीवार पेंटिंग से जुड़े कलाकार वहां अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें। बहरहाल, कराची में दीवारों पर जो कुछ लिखा, छापा जाता है, उसमें से ज्यादातर  उन दीवारों को बदसूरत बनाने वाले ही होते हैं। नजीर के तौर पर, लगभग तमाम सियासी जमातें सरकारी और प्राइवेट इमारतों की दीवारों पर अपनी आगामी रैलियों के इश्तहार चस्पां करती हैं या वे उन पर अपने आकाओं की तारीफ के बेलबूटे काढ़ती हैं या फिर अपने विरोधी नेताओं की खिल्लियां उड़ाती हैं। कराची की दीवारें तरह-तरह की चीजों और सेवाओं के इश्तहार के लिए भी इस्तेमाल होती हैं। इनमें वजन घटाने के अविश्वसनीय नुस्खों से लेकर उन डॉक्टरों की करामात तक शामिल है, जो काला जादू में अपनी उस्तादी का दावा करते हैं। इतना ही नहीं, फिरकापरस्त ताकतें और दहशतगर्द जमातें अपनी चेतावनियों और नफरत बोने वाले नारों से इन दीवारों को पाटकर समाज में नफरत के बीज बोने के काम करती हैं। इस लिहाज से सोमवार को सिंध असेंबली से पारित विधेयक उम्मीद बंधाता है। इस बिल के मुताबिक, सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों, उन्हें खराब करने वालों को न सिर्फ भारी जुर्माना चुकाना पड़ेगा, बल्कि जेल की सजा भी काटनी पड़ेगी। यकीन है कि यह कानून असरदार साबित होगा। जिस तरह से पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी, एमक्यूएम, और दूसरी सियासी जमातों ने सूबाई असेंबली के अंदर मिल-जुलकर इस बिल के पक्ष में वोट किया है, उसी भावना के साथ इन पार्टियों को यह मिसाल भी कायम करनी चाहिए कि वे अपने समर्थकों को इस बात के लिए कायल करें कि वे हमारे शहरों की सूरत नहीं बिगाड़ेंगे।
द डॉन, पाकिस्तान

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