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‘सचिन को बधाई, दद्दा को भी मिलता तो अच्छा होता’

‘सचिन को बधाई, दद्दा को भी मिलता तो अच्छा होता’

सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न का सम्मान तो मिल गया लेकिन हॉकी के जादूगर को सम्मान कब मिलेगा यह बड़ा सवाल है। इस बारे में जब ध्यानचंद के पुत्र अशोक ध्यानचंद्र से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सचिन तेंदुलकर को सम्मान मिलने पर उन्हें दिल से बधाई। साथ ही उन्होंने टीस व्यक्त करते हुए कहा कि सचिन को सम्मान बाद में दिया जा सकता था। सचिन को सम्मान दिया जाना बिल्कुल भी गलत नहीं है।

खेल मंत्रालय का ढीला रवैया इसमें सवाल खड़े करता है। वहीं लखनऊ में उनके पुत्र देवेंद्र ध्यानचंद ने फोन पर कहा कि भारत रत्न पर पहला हक ध्यानचंद्र का ही बनता था। हाल ही में कुछ लोगों ने जंतर-मंतर पर हॉकी के जादूगर को भारत रत्न दिलाने के लिए अनशन किया था। जब उनसे पूछा गया क्या परिवार ‘भारत रत्न’ के लिए अनशन तो नहीं करेगा? इस पर उन्होंने कहा कि सवाल ही नहीं उठता। परिजन कभी भी ऐसा कदम नहीं उठाएंगे।

जबरदस्त खेल के थे धनी
ध्यानचंद की मौजूदगी में भारतीय हॉकी टीम ने ओलंपिक में तीन स्वर्ण पदक जीते। 1928 में एम्सटर्डम, 1932 में लॉस एंजिल्स और 1936 में बर्लिन ओलंपिक। वह स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा थे। 2011 में सरकार ने संसद के 82 सदस्यों की मांग ठुकरा दी थी, जिन्होंने दद्दा को भारत रत्न देने की मांग की थी। पहले खिलाड़ियों को भारत रत्न नहीं मिलता था। इस नियम में गृह मंत्रालय ने बदलाव किया। खेल मंत्रालय ने जनवरी 2012 में ध्यानचंद, निशानेबाज अभिनव बिंद्रा व पर्वतारोही तेनजिंग नोर्गे के नाम की सिफारिश की। जिसके बाद सचिन को 200वें टेस्ट के बाद भारत रत्न देने की घोषणा हुई थी।

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