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हमारे देश में बेइमानोंकी भारी फौज: किरण बेदी

देश की पहली महिला आईपीएस किरण बेदी के मुताबिक हमारा देश गरीब नहीं है बल्कि यहां बेइमानों की भारी फौज है। न बस है, न रल, न गाड़ी न पैसा। जनता की स्थिति तो कैदियों से भी बदतर है। एक कार्यक्रम में शामिल होने पटना पहुंची मैग्सेसे अवार्डी किरण बेदी ने ‘हिन्दुस्तान’ से विशेष बातचीत में कहा कि वे इस बात को लेकर ज्यादा व्यथित रहती हैं कि हमारी गवर्नेस है, पूरा सिस्टम है, पर चालक नहीं है। ट्रांसपोर्टेशन की स्थिति बदहाल है। सड़कें बनती ही हैं शीघ्र टूटने के लिए और पब्लिक जवाबदेह लोगों से सवाल तक पूछने की स्थिति में नहीं है। श्रीमती बेदी किसी अभिभावक की बच्चों के प्रति कुर्बानी देखकर द्रविभूत हो जाती हैं। उन्हें किसी की देश के प्रति कुर्बानी अपील करती है। बच्चों द्वारा अभिभावकों को आदर देना उन्हें भाता है।ड्ढr ड्ढr अपनी दिनचर्या, सोच और काम के विस्तृत फलक की संक्षेपित चर्चा में किरण बेदी ने कहा कि वस्तुत: वे महिला हैं और यह सोचना बकवास है कि वे केवल महिलाओं के लिए काम करंगी। उनके लिए महिला व पुरुष में कोई फर्क नहीं है। जाति व जेंडर से उन्हें कोई लेना-देना नहीं और समाज के लिए काम करना इनका शगल है। खुद को सामाजिक कार्यकर्ता कहलाना अब श्रीमती बेदी को ज्यादा पसंद है। वर्ष 07 में पुलिस अधिकारी की नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की चर्चा करने पर तपाक से कहती हैं-मैं आज में जीती हूं और आज के लिए जीती हूं। पूरी दुनिया में चर्चित इस शख्सियत ने कहा कि समाज में जहां उनकी जरूरत होती है, वहां वे किसी न किसी रूप में मौजूद होती हैं। 35 सालों की आईपीएस की नौकरी के बाद इस उम्र में भी किरण सुबह से लेकर देर रात तक काम करती हैं। पर्यावरण, नशामुक्ित, शिक्षा, जेल के कैदी, बच्चे, महिलाएं सभी इनकी चिंताओं में शामिल हैं। अपनी दो एनजीओ के माध्यम से किरण हजारों लोगों के लिए काम कर रही हैं। बिहार बुलाये जाने पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि यहां लॉ एंड आर्डर की स्थिति बेहतर हुई है। क्राइम व पालिटिक्स की लिंकेज टूटीहै। गांवों में स्थानीय सेनाओं का तांडव रुका है। बिहार के एजेंडे में अब एजुकेशन शामिल हुआ है यह बेहतर भविष्य का संकेत है।ं

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