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चुप रहने वाले नेताओं को हराए जनता : वृंदा करात

रांची। वरीय संवाददाता। माकपा की पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात ने कहा कि पांच सालों में लोकसभा और राज्यसभा में झारखंड का मुद्दा नहीं उठा। यहां से जीतने वाले चुप रहे। उन्होंने राज्य के साथ विश्वासघात किया।

जनता के बीच पार्टी इसका हकीकत और संदेश लेकर जा रही है। ऐसे नेताओं को जनता चुनाव में हराए। उन्होंने कहा कि बंगाल सरकार तानाशाही कर रही है। कोलकाता पुस्तक मेला में महिलाओं पर लिखी डॉ यशोधरा बागची की किताब का विमोचन पर प्रतबिंध लगा दिया।

वह चार फरवरी को प्रेस से बात कर रही थी। इस अवसर पर राज्य सचवि गोपीकांत बक्शी और प्रकाश विप्लव भी मौजूद थे। नीतियों पर एकतावृंदा ने कहा कि अक्टूबर में दिल्ली में 18 दलों की बैठक हुई थी।

इसमें नेता नहीं बल्कि नीतियों पर एकता कायम किया जा रहा है। जीत के बाद सांसद खुद नेता चुन लेंगे। मौके पर आरएसएस और बीजेपी की सांप्रदायिकता के खिलाफ संघर्ष करने का प्रस्ताव पारित किया गया। यूपीए ने देश को बर्बाद कर दिया।

दोनो पार्टियों की बुनियादी नीतियों में कोई अंतर नहीं है। पार्टी ने जयललिता से चुनावी गठबंधन किया है। झारखंड में भी वामदलों के साथ गठबंधन का प्रयास हो रहा है। अन्य दलों पर निर्भर है कि वे साथ कैसे आते हैं।

सिद्धांतहीन गठबंधनकरात ने कहा कि झारखंड में सिद्धांतहीन गठबंधन है। विजन और कार्यक्रम पहले तय होने पर कोई काम होता है। यहां जनता के लिए न्यूनतम कार्यक्रम नहीं है। राज्य में मनरेगा फेल है। उसमें भ्रष्टाचार है। इसके सही तरीके से लागू होने पर पलायन रुक सकता था।

किसानों के पास केसीसी नहीं है। धान खरीद केंद्र नहीं होने से किसान कम कीमत में उत्पाद बेचने को मजबूर हैं। सत्ता में सहारा देने वाले के बैठे होने से दलाली चल रही है। कृषि भूमि अधिग्रहण के खिलाफ पांच फरवरी को सोनाहातू में रैली है।

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