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राज्य की कला विधाओं से रू-ब-रू होंगे युवा

 रांची। वरीय संवाददाता। झारखंड की कला, संस्कृति, इतिहास, धरोहर व 32 जनजातीयों के संगम को देखते हुए इतिहासकार अक्सर इस राज्य को चलते-फिरते संग्रहालय की संज्ञा देते हैं। इन्हीं विशेषताओं से युवाओं को रू-ब-रू कराएंगे इतिहासकार और पुरातत्ववेत्ता।

कला, संस्कृति, खेलकूद एवं युवाकार्य विभाग की ओर से राज्य संग्रहालय में एकदिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया है। 7 फरवरी को राज्य संग्रहालय में आयोजित इस राज्यस्तरीय सेमिनार में विभिन्न विश्वविद्यालयों के इतिहास के प्राध्यापक, पुरातत्ववेत्ता और शोधकर्ता हिस्सा ले रहे हैं।

कला-इतिहास की पड़तालसेमिनार का विषय है ‘झारखंड का कला इतिहास। ’ सेमिनार की अध्यक्षता रांची विश्वविद्यालय इतिहास के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो डॉ एचएस पांडेय करेंगे। इतिहासकार डॉ आइके चौधरी, डॉ गीता ओझा भी अपना व्याख्यान देंगे।

इनके अलावा विनोबा भावे, नीलांबर-पीतांबर, रांची विश्वविद्यालय आदि के इतिहास के प्रोफेसर और शोधकर्ता अपनी रसिरे्च पेपर प्रस्तुत करेंगे। शोधार्थी अपना रिसर्च पेपर अंग्रेजी या हिन्दी में तैयार कर सकते हैं। हर प्रतिभागी को छह मिनट का समय दिया जाएगा। व्याख्यान की प्रस्तुति के लिए एलसीडी प्रोजेक्टर की भी व्यवस्था की गई है।

इतिहास इसके जरिए झारखंड की प्राचीन कला विधाओं व उनके ऐतिहासिक महत्व से जुड़े तथ्यों को बताएंगे। साथ ही धरोहरों के संरक्षण व कला विधाओं के संवर्धन से जुड़ी बातें भी साझा की जाएंगी। बड़ी संख्या में इस सेमिनार में एम इतिहास के विद्यार्थी व स्कूलों के इतिहास के शिक्षक भी हिस्सा ले रहे हैं।

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