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चौरसिया के बांसुरीवादन ने वसंत का आनन्द दुगुना किया

पटना। संगीत साधना में साधक जितना अधिक समय बिताता है उसकी कला उतनी जवान होती है। इसका एक और प्रमाण मंगलवार को राजधानी में मिला। जीवन का 77वां बसंत देख रहे पद्मविभूषण पं. हरिप्रसाद चौरसिया के बांसुरीवादन में 17 वर्ष के युवा जैसी रवानी दिखी। करीब डेढ़ घंटे के कार्यक्रम में उन्होंने प्रेमचंद रंगशाला के मंच पर सुर से एक कहानी लिखी। कहानी का सारांश जहां शास्त्रीय संगीत की वविधिताओं में सिमटा रहा वहीं संदेश यह कि अपने संगीत से जुड़ कर ही हम संस्कारवान बन सकते हैं।

शाम ठीक पांच बजे मंचासीन होने वाले पं. हरिप्रसाद चौरसिया ने दो शास्त्रीय रागों की प्रस्तुति के बीच भजनों के जरिए श्रोताओं से संवाद किया। पहले अप्रचलित राग पटदीप की अवतारणा रूपक ताल, सात मात्रा में की। फिर श्रोताओं से मुखातबि हुए, बोले मैं एक भजन बजाता हूं आप लोग मेरे साथ गाए। बजाते-बजाते पंडित जी रुके और पूछा.. पहचाना? एक श्रोता ने बताया वैष्णवजन तो तेने कहिए जे..। आप सुर में गाएं मैं बजाता हूं। श्रोता ने उत्तर दिया आप ने जिस सुर में बजाया है उसके इर्दगिर्द फटक पाना भी मेरे लिए मुमकिन नहीं।

पंडित जी ने निराशा के भाव दर्शाए। फिर छोटी बांसुरी उठाई। बोले इस भजन को पहचानो और जिंगल बेल..जिंगल बेल.. बजाया। सभी उनके साथ गाने लगे। पंडित जी फिर रुके और बोले विदेशी भजन याद है और वैष्णवजन पहचान नहीं सके। चलिए एक भजन और बजाता हूं। उम्मीद है इस बार आप गाएंगे। उन्होंने ओम जय जगदीश हरे..बजाया, सब ने उनके साथ गाया। वह बोले आप अपने संगीत से जुड़े, संस्कृति से जुड़े रहोगे। ठीक शाम छह बजे उन्होंने बांसुरी पर राम यमन के सुर लगाए।

तीन ताल सोलह मात्रा में वादन के दौरान वह पूरे मूड में दिखे। आलापचारी में उन्होंने जो हरकतें शुरू कीं वे तराना चलीं। कभी आड़ लय लेकर सम पर आते तो कभी कुआड़। तबले के साथ सवाल-जवाब में एक नहीं दो-दो बार बिआड़ लय पर तबलावादक राशिद मुस्ताक थिरकुवा को गच्चा देकर पहले ही सम पर आ गए। अंत में तो हद ही कर दी। झुलन लय से उन्होंने सह बांसुरीवादक विवेक सोनार और तबलावादक दोनों को पहले ही सम पर गिरा दिया।

आरकेड बिजनेस कॉलेज एवं स्पीक मैके के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगीत संध्या में पंडित हरिप्रसाद चौरसिया ने सहज प्रश्नों के रोचक उत्तर दिए। अमित शर्मा- आप के गुरु कौन हैं?पद्मविभूषण- जो विद्या दे वहीं गुरु। राकेश सिन्हा- बांसुरी ही क्यों चुनी? पद्मविभूषण- सबसे सस्ती मिलती है?आदित्य अग्रवाल - आप के साथ तबला बजा सकता हूं?पद्मविभूषण- अगली बार थिरकुवा की जगह आप बैठना। एक श्रोता- सिलसिला का गाना सुनाएंगे? पद्मविभूषण- आप सरस्वती जी की आरती सिलसिला का गीत गाकर करेंगे?राजीव सिंह- कोई दूसरा फिल्मी सुना देंगे क्या?पद्मविभूषण- बीते दस साल से आप लोग जहां के तहां हैं।

महिला श्रोता- आप सरस्वती वंदना बजा दीजिएपद्मविभूषण- अच्छा..तो ठीक है आप मंच पर आकर गा दीजिए। स्वाति मिश्रा- आप का पसंदीदा राग कौन सा है?पद्मविभूषण- मां के सबसे छोटे बच्चों की तरह अप्रचलित राग।

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