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प्यार करने पर नक्सली धर्मेन्द्र को दिया गया था ‘मृत्युदंड’

एक प्रतिनिधि छपरा। मकेर के नक्सली धर्मेन्द्र कुमार राम की हत्या नक्सलियों की पंचायत में की गई थी। इसका खुलासा धर्मेन्द्र के पिता व मकेर के मधवल गांव निवासी लालबहादुर राम ने पानापुर थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में किया है।

प्राथमिकी में उसने बताया है कि उसका बेटा करीब दो साल पहले घर से बेंगलुरु कमाने जाने की बात कहकर निकला था। कुछ दिनों बाद पता चला कि वह उग्रवादी संगठन में शामिल होकर सारण जिले के ही पानापुर क्षेत्र में रहकर काम कर रहा है।

कुछ दिनों पहले डीही मकेर के बैजनाथ सहनी के पुत्र अमीन और अनील सहनी जो कि माओवादी संगठन के सदस्य हैं, घर आये और दोनों ने कहा कि तुम्हारा बेटे का संबंध नक्सली संगठन के एक नेता की नतिनी से हो गया है, जो माओवादी संगठन के सिद्धांतों के खिलाफ है।

इससे संगठन में काफी नाराजगी है। इसी नाराजगी को लेकर 31 जनवरी की शाम में गणेश शर्मा के घर पर उसे ‘मृत्युदंड’ देने के लिए बैठक बुलाई गई है। वह पानापुर के चौसा के गणेश शर्मा के घर शाम में पहुंचा तो उसने देखा कि संगठन की बैठक चल रही है।

उसमें हरहिर सहनी, श्रवणजी, व्यासजी, गणेश शर्मा, मोगल राय, नंदन शर्मा, राज कुमार शर्मा, पप्पू शर्मा, अशोक राय, लखनपुर (मशरक) के जवाहिर राम, महेन्द्र राम, बिजेन्द्र राम, नागेन्द्र राय, महेश राय, भगवानपुर वृत के महेश राम, बिजौली, अशोक सहनी, चक्की सुहागपुर के सुरेश राय, धर्मेन्द्रजी, चकिया के अरुण सिंह, डीही के अनिल व अमीन सहनी सहित करीब साठ की संख्या में नक्सली बैठे थे।

नक्सलियों के बीच उनका बेटा धर्मेन्द्र भी बैठा था। बैठक की समाप्ति पर धर्मेन्द्र को मृत्युदंड देने का निर्णय लिया गया। मृत्युदंड की सजा सुनाये जाने के बाद वे गणेश शर्मा, हरहिर सहनी व संगठन के अन्य सदस्यों से अपने बेटे को एक बार माफ करने की गुहार लगाते रहे परन्तु किसी ने उसकी बात नहीं सुनी। सबने कहा कि नक्सली नेता की नतिनी से प्यार की सजा मृत्युदंड ही है। कुछ देर बाद चौसा गांव के बाहर ले जाकर उसकी हत्या कर दी गई।

हत्या के बाद नक्सलियों ने कहा कि पुलिस को हत्या की खबर दी तो तुम्हारी भी हत्या कर दी जायेगी। मालूम हो कि एक फरवरी की सुबह चौसा-मेथौरा चंवर से धर्मेन्द्र का शव पुलिस ने बरामद किया गया था। ग्रामीणों ने पुलिस को वहां शव पड़े होने की सूचना दी थी। धर्मेन्द्र खुद का धनबाद के टुंडी थाना क्षेत्र का निवासी बता पानापुर के चौसा गांव में रह रहा था।

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