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मनरेगा में कम नहीं है महिलाओं की अनदेखी

बागपत। हमारे संवाददाता। लगता है मनरेगा अनियमित्ताओं का भंडार हैं। सोशल आडिट में कुछ भी सही नहीं मिला है। महिला मजदूरों की तो खूब अनदेखी हो रही है। अधिकांश प्रधान तथा ग्राम सचवि ग्रामीणों को मनरेगा खर्च का रिकार्ड दिखाने से परहेज करते हैं। लेकिन प्रधानों तथा सचविों पर गाज गिरनी तय है,क्योंकि जिला विकास अधिकारी हाकिम सिंह ने कार्रवाई का आदेश दिया है। मजदूरों को भूखा मरने से बचाने को सरकार ने मनरेगा चला रखी है।

बागपत का चालू साल का 8.43करोड़ का बजट है जिसमें 5.96 करोड़ खर्च हो चुका। ललियाना, मंसूरपुर, खला तथा पूरनपुर नवादा गांवों में सोशल आडिट में मनरेगा की असलियत की पोल खुलकर सामने आ गई। जॉब कार्डो पर मजदूरों के फोटो नहीं लगे मिले। कुल मजदूरों में महिला को 33 फीसदी के बजाय चार से दस फीसदी भागेदारी रही। कार्य आवंटन की सूची नोटिस बोर्ड पर चस्पा नहीं कराना। मजदूरों का नहीं समझाना कि क्या काम करना है? छानबीन करने को आम आदमी को मस्टररोल उपलब्ध नहीं कराया।

कार्यस्थल पर सामग्री पंजिका नहीं मिली। कार्य से पहले और बाद में फोटाग्राफ कराकर आम आदमी को नहीं दिखाना। रोजगार कार्ड सूची को अपडेट नहीं रखना। मजदूरों को मजदूरी पर्ची उपलब्ध न कराना। दीवारों पर वाल पेंटिंग नहीं करवाना। काम निर्धारण में आवेदन पत्र प्राप्त होने की तिथि के आधार पर रोस्टर नहीं बनाना समेत अनेक गड़बडिम्यां हैं। ं।

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