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पापिया घोष कांड के घोषित इनाम में लगा पेंच

तेरह दिसम्बर 2006 को पाटलिुत्र कॉलोनी में हुए बहुचर्चित प्रो. पापिया घोष और उनकी नौकरानी मालती हत्या कांड का उद्भेदन करने वाली पटना पुलिस इस मामले में घोषित इनाम पाने के लिए अब कोर्ट पर टकटकी लगाए रहने को बाध्य है। सरकार द्वारा लिए गए फैसले के अनुसार आरोपितों पर ‘कनविक्शन’ होने के बाद ही उन्हें यह इनाम मिलेगा।ड्ढr किसी जटिल मामले के उद्भेदन पर दिए जाने वाले पुरस्कार के इतिहास में यह पहला मौका है जब इस तरह का फैसला लिया गया हो। मुख्यालय सूत्रों पर अगर यकीन करं तो घोषित पुरस्कार में लगा पेंच का कारण मुख्यालय में व्याप्त गुटबंदी है। कुछ वरीय अधिकारियों को इस मामले में तत्कालीन एसएसपी कुंदन कृष्णन को पुरस्कार स्वरूप रिवालवर देने की घोषणा रास नहीं आयी और घोषित पुरस्कार राजनीति की भेंट चढ़ गया।ड्ढr ड्ढr गौरतलब है कि पापिया और उनकी नौकरानी के हत्यारों ने घटनास्थल पर कोई ऐसा सूत्र नहीं छोड़ा था जिससे पुलिस उन तक पहुंच पाती। इस घटना की देश-विदेश तक हुई भर्त्सना के बाद मुख्यमंत्री से लेकर तमाम वरीय अधिकारियों ने तब इसे अपनी नाक और साख का सवाल मानते हुए हर कीमत पर हत्यारों को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया था। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने इस मामले का उद्भेदन कर हत्या में शामिल सात अपराधियों में से गिरफ्तार कर पापिया घोष के आवास से लूटी गई कार, कम्प्यूटर व कपड़े सहित अन्य सामान बरामद कर लिये। यह दीगर बात है कि मुश्तकीम और संयोग राय नामक दो आरोपित आज तक पकड़े जा नहीं सके। इस मामले का उद्भेदन होने के बाद सरकार ने तब पटना के तत्कालीन एसएसपी कुंदन कृष्णन को एक रिवाल्वर, डीएसपी कुमार अमर सिंह को 30 हाार नगद, पाटलीपुत्रा, बुद्धा कॉलोनी, कोतवाली और गर्दनीबाग के तत्कालीन थानाध्यक्ष क्रमश: एन के सिंह, के के सिंह, अजय कु मार और अभय नारायण सिंह सहित अनुसंधानकर्ता कुमार अभिनव को 10-10 हाार नकद इनाम की घोषणा की थी। तत्कालीन डीाीपी आशीष रांन की अनुशंसा के बाद इस मामले पर राजनीति शुरू हो गई, जिसके फैसले ने अब एक इतिहास कायम कर दिया है। आशिक को फंसाने को लिखी थी चिट्ठीड्ढr मो. सिकन्दर पटनाड्ढr प्रेम विवाह करने वाले आशिक संजीव को सबक सिखाने के लिए माशूका के घरवालों ने ऐसी साजिश रची की वह सलाखों के पीछे पहुंच जाये। हालांकि बिजनौर में पटना पुलिस ने इस राज का पर्दाफाश कर दिया। रहस्योद्घाटन के साथ यह भी स्पष्ट हो गया है कि रहस्यमय तरीके से जज की गायब बेटी रानी अर्चना के बिजनौर में होने की बात साजिश के तहत लिख कर गांधी मैदान थानाध्यक्ष के नाम भेजी गई थी। गुमनाम चिट्ठी के आधार पर बिजनौर (उत्तर प्रदेश) के चांदपुरा थानांतर्गत बागरपुरा गांव में खोजबीन करके पुलिस टीम खाली हाथ राजधानी लौट आई है। पत्र के प्रेषक दिनेशचन्द्र पंखवार की भी पुलिस ने तलाश की लेकिन कोई नहीं मिला।ड्ढr ड्ढr पुलिस सूत्रों के अनुसार बागरपुरा (बिजनौर) निवासी युवती प्ररणा (प्रमिका) के परिानों ने ही गुमनाम पत्र भेजते हुए प्रेरणा व अर्चना को संजीव कुमार द्वारा बंधक बनाये जाने की सूचना दी थी। अनुसंधान में अधिकारियों को पता चला कि मेडिकल रिप्रजेंटेटिव संजीव ने प्रेरणा से प्रेम विवाह किया है। यह बात प्रेरणा के परिानों को नहीं भाई और पटना पुलिस को यह पत्र टाइप करके भेज दिया। पुलिस की दो सदस्यीय टीम अर्चना का फोटो भी बिजनौर साथ ले गई थी। जब प्रेरणा का चित्र बागरपुरा के लोगों ने देखा तो पुलिस को बताया कि प्रेरणा और संजीव दोनों साथ-साथ रहते हैं। प्रेरणा ने बताया कि प्रम विवाह से उसके मां-बाप व परिान खुश नहीं है। जिस कारण उन्हीं लोगों ने यह षडयंत्र रचा है।

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  • Web Title: पापिया घोष कांड के घोषित इनाम में लगा पेंच