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खत्म कर दो कंपनीराज, अपने हाथ में ले लो कमान

नई दिल्ली, वरिष्ठ संवाददाता। निजी कंपनियां बार- बार अपनी खस्ताहाल स्थिति का हवाला देते हुए दिल्ली वालों की बिजली गुल करने धमकी दे रही है। गर्मियां आने वाली है और दिल्ली वालों को गर्मियों में बिजली संकट से जूझना पड़ सकता है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल तेजेंद्र खन्ना को खुला पत्र लिखा है। पत्र के माध्यम से उपराज्यपाल से आग्रह किया गया है कि यदि बिजली कंपनियां ऐसे हालात पैदा करती है तो उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाना चाहिए।

सरकार ने कंपनी राज खत्म करके व्यवस्था को अपने हाथों ले लेना चाहिए। कंपनियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जा सकें। इसके लिए दिल्ली सरकार के ऊर्जा सचविके माध्यम से लिखा गया पत्र भी उपराज्यपाल को भेजा गया है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि आम जनता की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए इस संबंध में दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग को पहले ही चेता दिया गया है। वित्तीय संकट के चलते किसी भी ब्लैक आउट को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

विद्युत एक्ट 2003 का हवाला देते हुए यह भी बताया गया है कि आयोग के पास ही बिजली कंपनियों से संबंधित मामलों में आखिरी निर्णय लेने का अधिकार हैं। सख्त आदेशों के बाद भी यदि बिजली कंपनियां कटौती करती हैं इन कंपनियों के लाइसेंस खत्म किए जाएंगे और कंपनियों को टेकओवर कर लिया जाए। यह एक गंभीर मुद्दा है जो आपके संज्ञान में लाया जा रहा है। इसलिए इस स्थिति को नियंत्रित करने में सरकार की मदद करें जो बिजली कंपनियों ने पैदा की है।

एक सप्ताह में सामने आएगी बिजली कंपनियों की रिपोर्टदिल्ली सरकार की शिकायत के बाद डीईआरसी ने कंपनियों की जांच शुरू कर दी है। इस जांच में कंपनियों की वित्तीय स्थिति का आंकलन किया जा रहा है और किन कारणों से वित्तीय संकट पैदा हुआ है इस पर जवाब मांगा जा रहा है। आयोग के अध्यक्ष पी.डी.सुधाकर ने बताया कि एक सप्ताह में इस मामले में आखिरी रिपोर्ट सामने आ जाएगी। जिसके आधार पर आयोग निर्णय लेगा। इसके लिए कंपनियों से भी जानकारियां जुटाई जा रही है।

क्या कहती है बीएसईएस यदि सरकार लाइसेंस रद्द करती है तो यह गैर कानूनी होगा। इससे हमारे हजारों कर्मचारियों का मनोबल टूटेगा जिन्होंने इतनी मेहनत की है। हमें उम्मीद है कि डीईआरसी स्वतंत्र व निष्पक्ष तरीके से जांच करेगा। सरकार के इस प्रस्तावित कदम से ऊर्जा क्षेत्र को काफी निराशा हुई है और इसका असर देश की आर्थिक स्थिति पर भी होगा। क्या है मामलाएनटीपीसी ने कहा कि भुगतान की समय सीमा में बढ़ोत्तरी नहीं की जा सकती। कंपनियों ने इसे 60 दिन बढ़ाने के लिए कहा था।

बताया जा रहा है कि बीआरपीएल ने बकाया 168.29 करोड़ में से सिर्फ 84 करोड़ का भुगतान किया है। मामले में एनटीपीसी ने जनवरी 2014 में ही कंपनी को चेता दिया था। बीएसईएस का कहना है कि अब 10 फरवरी तक की मोहलत दी गई है और इस समय सीमा तक भुगतान नहीं होने पर 11 फरवरी से बिजली काटने की चेतावनी दी गई है।

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