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तेहरान में बदलता मौसम

पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि ईरान और पश्चिमी देशों के रिश्तों के बीच जमी बर्फ पिघल रही है। सालों बाद फ्रांस के बड़े कारोबारियों के एक जत्थे का ईरान की सरजमीं पर पुरजोर स्वागत किया गया और तेहरान की हुकूमत ने उन्हें यह एहसास कराया कि यूरोप के साथ रिश्तों की एक नई इबारत की शुरुआत हो रही है। यूरोप, खासकर फ्रांस की कंपनियां तेल और गैस उत्पादक ईरान में अपने हितों से बखूबी वाकिफ हैं। इस दौरे की अहमियत का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद तेहरान आने वाला यह सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल है, जिसमें फ्रांस की बड़ी कंपनियों के 100 से ज्यादा आला अफसर शामिल हैं। अभी चंद रोज पहले ही अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने ईरान के अपने समकक्ष मंत्री मोहम्मद जावेद जरीफ से कहा था कि ईरानी परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी मुल्कों में जो शक-शुबहा है, उसे दूर करने के लिए दोनों पक्षों को एक-दूसरे का भरोसा जीतने की कोशिश करनी चाहिए।

केरी का यह सुखद बयान उस वक्त आया, जब दुनिया की बड़ी ताकतों के साथ ईरान की 18 फरवरी से बातचीत होने वाली है। गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में ईरान द्वारा यूरेनियम संवर्धन को नियंत्रित करने और अपने परमाणु केंद्रों की अंतरराष्ट्रीय जांच की इजाजत देने के बारे में दोनों पक्षों के बीच जो शुरुआती सहमति बनी थी, उसके तहत फरवरी की बातचीत तय थी। 18 फरवरी से शुरू हो रही बातचीत के सुखद परिणाम की उम्मीद मजबूत हुई है, क्योंकि इस वक्त माहौल दोस्ताना है। दरअसल, ईरान और पश्चिमी देश, दोनों यह अच्छी तरह से जान चुके हैं कि रिश्तों में गरमाहट से दोनों का ही फायदा है। ईरान के लिए इस बातचीत में अपार संभावनाएं हैं, जिससे वह खुद को दुनिया की मूल धारा से जोड़ सके और अपनी माली हालत को पटरी पर लाने के तमाम मौकों का भरपूर लाभ उठा सके, तो वहीं पश्चिमी मुल्कों के लिए ईरान में कारोबार के बेमिसाल मौके मौजूद हैं। एक ऐसे दौर में, जब दुनिया की इकोनॉमी बुरे हालात से गुजर रही है, तब ईरान उन्हें सुनहरा मौका उपलब्ध करा सकता है।  
द पेनिनसुला, कतर

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