DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आप से सवाल

जो लोग इतिहास से सबक नहीं लेते, वे अपने समाज और देश को सही दिशा में नहीं ले जा सकते। ऐसा कई बार होता है कि शासक कुछ ऐसा कर जाते हैं, जिनके लिए मजबूरन कहना पड़ता है- लम्हों ने खता की थी, सदियों ने सजा पाई। ऐसी ही गलतियों के कारण हम सैकड़ों वर्ष गुलाम रहे। हम जानते हैं कि भारत का लोकतंत्र अगर इतने वर्षो तक बचा रहा है, तो उसका एक कारण है सेना और पुलिस-बल का सत्ता की राजनीति से दूर रहना। पाकिस्तान हमारे साथ ही आजाद हुआ था, लेकिन वहां यह दूरी बची नहीं, इसलिए आज भी वहां की सरकार सेना की मरजी के बगैर दो कदम नहीं चल सकती। अपने देश में एक राज्य का मुख्यमंत्री पुलिस से वर्दी उतार फेंकने की बात करता है और कहता है कि पुलिसकर्मी सक्रिय राजनीतिक आंदोलन में कूद पड़ें। भारत के इतिहास में इस तरह की घटना पहली बार ही दिखी है। आखिर ऐसा क्या है आम आदमी पार्टी के आंदोलन में? किस महान उद्देश्य के लिए पुलिस-व्यवस्था को भ्रमित करने की कोशिश हो रही है? हमें भी सोचना होगा कि कहीं आप की राह देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा तो नहीं है?
लोक सेतिया, फतेहाबाद, हरियाणा

दिल्ली की राजनीति

दिल्ली में खंडित जनादेश की स्थिति में आम आदमी पार्टी, यानी आप को सरकार नहीं बनाना चाहिए था। इसके बावजूद इस पार्टी ने अपनी नीतियों और सिद्धांतों से समझौता करके सरकार बनाने की चुनौती स्वीकार की। कांग्रेस का साथ मिला और एक कामचलाऊ सरकार बन गई। लेकिन कुछ दिनों बाद ही यह लगने लगा कि यह कामचलाऊ सरकार भी नहीं है। इसके कारण तो दिल्ली विधानसभा सर्कस का मैदान बन गई है, जहां कांग्रेस के नेता मदारी हैं और आप के नेता सर्कस के जानवर। जनता को शासन की जगह मनोरंजन परोसा जा रहा है। इसलिए तो शासन चलाने की जिम्मेदारी और जनता को राहत देने की भावना शून्य है। क्या आप के नेता ऐसा कोई प्रमाण दे सकते हैं कि दिल्ली में उनकी सरकार बनने से भ्रष्टाचार और अपराध में कमी आई है? क्या वाकई बिजली-पानी के दामों में राहत मिली है? अरविंदजी सर्कस छोड़कर सरकार चलाओ, अन्यथा छह माह बाद जब कांग्रेस समर्थन वापस लेगी, तब आप और आपका राजनीतिक करियर डूब जाएगा।
कमल कुमार जैन, कैलाश नगर, दिल्ली

राहुल को बधाई

अपनी पार्टी में रहकर भी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अन्य पार्टी-सदस्यों से अलग दिखते हैं। वह विवादित मुद्दों पर हल्ला-बोल नहीं करते, बल्कि जन-सरोकार के मसले हल करते हैं। बीते दिनों उन्होंने इसका एक और नमूना पेश किया। कांग्रेस नेताओं की एक बैठक में उन्होंने साफ-साफ कहा कि प्रधानमंत्रीजी, देश की महिलाओं को सब्सिडी वाले नौ नहीं, बल्कि 12 सिलेंडर चाहिए। इससे पहले भी विभिन्न मंचों से वह इस मुद्दे को उठाते रहे थे। उनकी कोशिश रंग लाई और अब सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या 12 बारह हो गई। चाहे परिवार छोटा ही क्यों न हो, एक गैस सिलेंडर अधिक से अधिक एक महीने चलता है। इस नए कदम से आम जनता को बड़ी राहत महसूस हुई है।
रोशन लाल बाली, महरौली, दिल्ली

आयोग और सियासत

चाहे राष्ट्रीय महिला आयोग हो या राज्यों के महिला आयोग, ये सब राजनीति के अखाड़े बन गए हैं। यहां सामाजिक कार्यकर्ताओं को कम ही जगह मिलती है। ज्यादातर राजनीति से संबंध रखने वाली महिलाएं होती हैं। जिस दल की सरकार होती है, अध्यक्ष भी उसी दल की या उसकी  करीबी होती है। इसलिए महिला-मुद्दों पर विचार करने वाले इस आयोग की गरिमा गिरी है। कभी इसकी सदस्य पीड़िता का नाम ले लेती हैं, तो कभी लड़कियों के पहनावे पर कटाक्ष किया जाता है। ऐसे तमाम आयोगों को राजनीति से दूर रखना आज के समय की मांग है। 
जसवंत सिंह, शांतिकुंज, नई दिल्ली

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:आप से सवाल