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मनमोहन को उम्मीद, पारित होगा तेलंगाना विधेयक

मनमोहन को उम्मीद, पारित होगा तेलंगाना विधेयक

संसद सत्र की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को कहा कि सरकार सदस्यों द्वारा उठाए जाने वाले किसी भी मुद्दे पर चर्चा को तैयार है। साथ ही उम्मीद जताई कि महत्वपूर्ण तेलंगाना विधेयक पारित हो जाएगा हालांकि विपक्ष ने सत्ताधारी पार्टी से कहा कि वह उपदेश न दे।

लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद सिंह ने कहा कि निश्चित तौर पर तेलंगाना का मुद्दा महत्वपूर्ण है। हम संसद में विधेयक लाएंगे। मुझे पूरी उम्मीद है कि कई साल की लंबी चर्चा के बाद सदन अपने विवेक से कामकाज कर सकेगा और विधेयक पारित करेगा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार रोधी विधेयकों, महिला आरक्षण और सांप्रदायिक हिंसा विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक लंबित हैं।

उधर, संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने तेलंगाना और भ्रष्टाचार रोधी विधेयकों पर विपक्ष से अधूरे मन से नहीं बल्कि उचित समर्थन की अपील की। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने कहा कि कांग्रेस तेलंगाना पर समर्थन और विरोध दोनों की राजनीति कर रही है। उसके मुख्यमंत्री (आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री किरन कुमार रेड्डी) विधेयक को नकार देते हैं।

कमलनाथ ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि आजादी के बाद से 15वीं लोकसभा ऐसी लोकसभा रही, जिसमें सदन की बैठक सबसे अधिक बाधित हुई। हालांकि इस दौरान खाद्य सुरक्षा विधेयक और भूमि अधिग्रहण विधेयक जैसे कई ऐतिहासिक विधेयक भी पारित हुए। इस सत्र के लिए 39 विधेयक सूचीबद्ध हैं। पांच जनवरी से शुरू हो रहा सत्र शीतकालीन सत्र का ही विस्तार है।

संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि भाजपा भ्रष्टाचार रोधी विधेयकों और तेलंगाना विधेयक पर आधा समर्थन और आधा विरोध की नीति अपना रही है। उन्होंने मुख्य विपक्षी दल से आग्रह किया कि वह ऐसा करने से बचे। उन्होंने कहा कि यह मामला अशांति फैलाकर शांत नहीं हो सकता क्योंकि तेलंगाना के 17 और सीमांध्र के 25 सदस्य सदन में हमेशा रहेंगे ही। इस मामले को अब शांत करना चाहिए। किसी भी राजनीतिक दल को यह तर्क नहीं देना चाहिए कि सदन नहीं चल रहा है। यह मुद्दा किसी पार्टी का मुद्दा नहीं है।

नाथ ने कहा कि सरकार का पूरा प्रयास होगा कि तेलंगाना विधेयक पारित हो, लेकिन ये प्रयास केवल सरकार की ओर से नहीं होना चाहिए। सभी दलों की ओर से प्रयास होना चाहिए। यह मुद्दा तभी हल होगा जब इस बारे में हर कोई मिलकर फैसला करे।

सुषमा ने यह कहते हुए जवाबी प्रहार किया कि हमने सरकार को अपनी ओर से पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया था लेकिन ये भी कहा था कि जहां तक तेलंगाना का सवाल है, कांग्रेस पूर्ण समर्थन के साथ ही पूर्ण विरोध भी कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के प्रधानमंत्री ने विधेयक को अपनी मंजूरी के साथ भेजा था, जिसे कांग्रेस के एक मुख्यमंत्री ने ही नामंजूर कर दिया।

सुषमा ने कहा कि नाथ को दूसरों को उपदेश नहीं देना चाहिए। कांग्रेस तेलंगाना के मुद्दे पर समर्थन और विरोध दोनों में बोल रही है। वह चित भी मेरी पट भी मेरी चाहती है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पूर्वोत्तर राज्यों के छात्रों के साथ दुर्व्यवहार, श्रीलंकाई नौसेना द्वारा तमिल मछुआरों को पकड़ने सहित कुछ मुद्दे उठाना चाहती है। जदयू के अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि सभी पार्टियों ने संसद चलाने में समर्थन की बात कही है।

उन्होंने कहा कि ऐसी सहमति बनी है कि शून्यकाल के दौरान महत्वपूर्ण मसले उठाने की अनुमति देनी चाहिए भले ही कार्यवाही में बाधा पहुंच रही हो। शोरगुल हो तो भी हम संसद में ऐसे मसले उठाएंगे। पूर्वोत्तर के लोगों के साथ भेदभाव, किसान, प्रोन्नति में आरक्षण जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।

तेलंगाना पर यादव ने महसूस किया कि संसद में मुश्किल हालात पैदा होंगे। हम सभी चाहते हैं कि संसद चले। यदि सरकार और सत्ताधारी पार्टी अपने सांसदों को समझा सके तो हम भी समझाने की कोशिश करेंगे। संसद चलनी चाहिए। यदि संसद नहीं चलती तो देश भी नहीं चलेगा।

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